आपने भी इंडेक्स फंड के बारे में सुना होगा । पर मन में ये सवाल जरूर आता होगा की क्या इंडेक्स फंड में निवेश करना सही है । क्या इंडेक्स फंड सेफ है । (Kya Index Fund Safe Hai) . आइये इस आर्टिकल में जानते हैं इंडेक्स फंड में निवेश करना कितना सही है।
रमेश की कहानी – हर भारतीय की कहानी
रमेश बत्तीस साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। पुणे में रहते हैं और महीने में पचहत्तर हजार रुपये कमाते हैं। किराया, घर का खर्च, बच्चे की फीस निकालने के बाद हर महीने बीस हजार रुपये बच जाते हैं। लेकिन इन बीस हजार रुपयों को लेकर वे परेशान रहते हैं।
एक रविवार की शाम, रमेश अपने दोस्तों के साथ कॉफी पी रहे थे। हर दोस्त की अलग सलाह थी। संजय उत्साह से बोला, “भाई, स्टॉक्स में पैसा लगाओ। मैंने पिछले साल अकेले चालीस प्रतिशत रिटर्न बनाया है। अडानी के शेयर खरीदे थे, देखो कितना बढ़ गया!”
प्रिया ने कहा, “म्यूचुअल फंड सबसे बेहतर है। एसआईपी लगाओ और भूल जाओ। मेरा एक एडवाइज़र है, बहुत अच्छा है। वो तुम्हें भी मदद कर देगा।”
घर पहुंचे तो पिताजी ने समझाया, “बेटा, यह सब जुआ है। फिक्स्ड डिपॉजिट में रख दो। साल के छह परसेंट तो पक्के मिलेंगे। पैसा तो डूबेगा नहीं।”
भाभी ने अपनी राय दी, “देखो, हमारे परिवार में तो हमेशा से सोना ही सुरक्षित रहा है। सोने की कीमत कभी नहीं गिरती। गोल्ड खरीद लो।”
रमेश के दिमाग में चक्कर आ गया। स्टॉक्स में तो उन्हें रिस्क ज्यादा लग रहा था। पूरे दिन मार्केट देखना, कब खरीदें कब बेचें, यह सब वे नहीं कर सकते। म्यूचुअल फंड में तो दो हजार से ज्यादा विकल्प हैं। कौन सा चुनें? एडवाइज़र को कैसे भरोसा करें? फिक्स्ड डिपॉजिट में महंगाई से भी कम रिटर्न मिल रहा है। और गोल्ड के रिटर्न का कोई भरोसा नहीं।
रमेश को चाहिए कुछ ऐसा जो सरल हो और समझने योग्य। जिसमें ज्यादा समय न लगे क्योंकि उनके पास दफ्तर और परिवार की जिम्मेदारी है। रिस्क कंट्रोल में रहे और फिक्स्ड डिपॉजिट से बेहतर रिटर्न मिले। इंडेक्स फंड रमेश जैसे हजारों भारतीयों के लिए परफेक्ट जवाब है। आइए समझते हैं क्यों।
जिंदगी आसान बना देने वाला निवेश
प्रतिभा तीस साल की स्कूल टीचर हैं। सुबह साढ़े सात बजे घर से निकलती हैं और शाम पांच बजे लौटती हैं। उसके बाद बच्चों का होमवर्क, खाना बनाना, घर संभालना। वीकेंड पर भी स्कूल के काम होते हैं। उनके पास यह समय कहां है कि रोज मार्केट की खबरें पढ़ें, स्टॉक्स की कीमतें चेक करें, और तय करें कि कब खरीदें या बेचें?
दो हजार उन्नीस में प्रतिभा ने एक बहुत सरल फैसला किया। उन्होंने निफ्टी पचास इंडेक्स फंड में तीन हजार रुपये महीना की एसआईपी शुरू की। बैंक से ऑटो-डेबिट लगा दिया। हर महीने की दस तारीख को अपने आप पैसा कट जाता और इंडेक्स फंड में चला जाता।
पांच साल में प्रतिभा ने कुल केवल छह बार अपना इन्वेस्टमेंट अकाउंट खोला। पहली बार जब अकाउंट बनाया, फिर हर साल एक बार स्टेटमेंट देखने के लिए। बस। कोई रोज की चिंता नहीं, कोई मार्केट ट्रैकिंग नहीं, कोई स्ट्रेस नहीं।
पांच साल बाद जब प्रतिभा ने देखा तो वे हैरान रह गईं। उन्होंने कुल एक लाख अस्सी हजार रुपये निवेश किए थे और उनके फंड की वैल्यू ढाई लाख रुपये हो चुकी थी। सत्तर हजार रुपये का फायदा। कोई टेंशन नहीं, कोई दिमागी मेहनत नहीं। यही है इंडेक्स फंड का असली जादू – “सेट इट एंड फॉरगेट इट”।
पांच सौ रुपये से शुरू होती है अमीरी की कहानी
भारत में सत्तर प्रतिशत लोग यह कहते हैं कि उनके पास निवेश करने के लिए ज्यादा पैसा नहीं है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इंडेक्स फंड में आप महज पांच सौ रुपये महीना से शुरुआत कर सकते हैं? हां, सिर्फ पांच सौ रुपये।
आइए तुलना करते हैं। अगर आप रियल एस्टेट में निवेश करना चाहें तो कम से कम पच्चीस से पचास लाख रुपये चाहिए। गोल्ड की ज्वेलरी खरीदनी हो तो तीस से पचास हजार रुपये चाहिए। समझदारी से डायरेक्ट स्टॉक्स में निवेश करना हो तो कम से कम पचास हजार से एक लाख रुपये चाहिए ताकि आप दस-पंद्रह अलग-अलग कंपनियों में पैसा लगा सकें।
लेकिन इंडेक्स फंड में आप पांच सौ रुपये से शुरू कर सकते हैं। पांच सौ रुपये महीना मतलब साल में छह हजार रुपये। अगर आप चाय-कॉफी पर रोज पचास रुपये खर्च करते हैं तो महीने में यह डेढ़ हजार रुपये होता है। सिर्फ एक तिहाई बचाकर आप निवेश की दुनिया में कदम रख सकते हैं।
अब सवाल यह है कि इतनी छोटी रकम से क्या होगा? आइए देखते हैं। अगर आप पांच सौ रुपये महीना की एसआईपी दस साल तक करें और बारह प्रतिशत सालाना रिटर्न मिले, तो दस साल में आपके पास एक लाख पंद्रह हजार रुपये होंगे। बीस साल में यह रकम बढ़कर पांच लाख रुपये हो जाएगी।
अगर आप हजार रुपये महीना करें तो दस साल में दो लाख तीस हजार और बीस साल में दस लाख रुपये। दो हजार महीना करें तो बीस साल में बीस लाख रुपये। पांच हजार महीना करें तो बीस साल में पचास लाख रुपये। यह है छोटी शुरुआत की ताकत।
भारत के साथ बढ़ता आपका पैसा
जब आप निफ्टी पचास इंडेक्स फंड में निवेश करते हैं, तो आप क्या खरीद रहे हैं? आप खरीद रहे हैं भारत की सबसे बड़ी और सबसे सफल कंपनियों का हिस्सा। रिलायंस जियो है जो हर भारतीय के मोबाइल में है। एचडीएफसी बैंक है जो देश का सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक है। टीसीएस और इन्फोसिस हैं जो पूरी दुनिया को आईटी सर्विस देते हैं। एशियन पेंट्स है जो हर घर की दीवारों को रंगता है। मारुति सुजुकी है जो हर तीसरी भारतीय कार बनाती है।
ये कंपनियां हैं भारत का गौरव। जब भारत की अर्थव्यवस्था बढ़ती है तो ये कंपनियां बढ़ती हैं। जब ये कंपनियां बढ़ती हैं तो आपका पैसा बढ़ता है। यह तो बिल्कुल सीधा गणित है।
इतिहास भी इसकी गवाही देता है। दो हजार दस में निफ्टी पचास पांच हजार अंक पर था। दो हजार चौबीस में यह बाईस हजार अंक पर पहुंच गया। यानी चौदह साल में तीन सौ चालीस प्रतिशत की बढ़ोतरी। यह नहीं हुआ एक दिन में या एक महीने में। यह हुआ धीरे-धीरे, लगातार, लेकिन निश्चित रूप से। और जो लोग इस यात्रा में शामिल रहे, उन्होंने अपनी संपत्ति कई गुना बढ़ा ली।
रात को चैन की नींद आना भी तो जरूरी है
अमित की कहानी बहुत दिलचस्प है। उन्होंने दो हजार इक्कीस में पेटीएम के आईपीओ में दो लाख रुपये लगाए थे। उस वक्त चारों तरफ पेटीएम की चर्चा थी। लगता था कि यह स्टॉक आसमान छू लेगा। अमित ने उत्साह में अपनी पूरी बचत लगा दी।
फिर शुरू हुआ एक अजीब सा दौर। अमित सुबह उठते ही सबसे पहले अपना फोन उठाते और पेटीएम का शेयर प्राइस देखते। दफ्तर में हर घंटे चुपके से मोबाइल निकालकर चेक करते। मीटिंग में भी ध्यान नहीं रहता। खाने की मेज पर परिवार बात कर रहा होता और अमित के दिमाग में पेटीएम घूम रहा होता। रात को नींद में भी शेयर प्राइस के सपने आते।
और फिर वह हुआ जिसका डर था। पेटीएम का शेयर गिरना शुरू हुआ। दस प्रतिशत गिरा, फिर बीस, फिर तीस। अमित की मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी। घर में चिड़चिड़ापन बढ़ गया। पत्नी से बात करते हुए भी गुस्सा आ जाता। बच्चों पर चिल्लाने लगे। एक साल में पेटीएम साठ प्रतिशत गिर गया। अमित के दो लाख रुपये घटकर अस्सी हजार रह गए। एक लाख बीस हजार का नुकसान। लेकिन सबसे बड़ा नुकसान था मानसिक शांति का खो जाना।
अब सुनीता की कहानी सुनिए। उन्होंने भी दो हजार इक्कीस में दो लाख रुपये निवेश किए थे, लेकिन निफ्टी पचास इंडेक्स फंड में। सुनीता का रूटीन बिल्कुल अलग था। वे महीने में एक बार, महीने की आखिरी तारीख को अपना स्टेटमेंट देखती थीं। बस पांच मिनट। बाकी समय वे अपने काम में, अपने परिवार में, अपनी जिंदगी में व्यस्त रहतीं।
जब बाजार गिरता तो सुनीता को कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्हें पता था कि वे लंबी अवधि के लिए निवेश कर रही हैं। उनकी नींद पूरी होती। परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताती। दफ्तर में पूरे मन से काम करतीं। और दो हजार चौबीस तक जब उन्होंने देखा तो उनके दो लाख रुपये बढ़कर ढाई लाख अस्सी हजार हो गए थे। चालीस प्रतिशत रिटर्न। कोई टेंशन नहीं, कोई नींद की कमी नहीं, परिवार के साथ रिश्ते अच्छे।
यह है इंडेक्स फंड निवेश की खूबसूरती। यह सिर्फ पैसा नहीं बढ़ाता, यह आपकी जिंदगी की क्वालिटी भी बढ़ाता है।
जब आप खुद से ही नहीं लड़ते
मार्च दो हजार बीस। कोविड महामारी ने दुनिया को हिला दिया। भारतीय शेयर बाजार चालीस प्रतिशत गिर गया। हर तरफ डर और घबराहट। राजेश ने अपनी सारी म्यूचुअल फंड होल्डिंग्स बेच दीं। उनके पास दस लाख रुपये थे जो छह लाख रुपये में बिक गए। चार लाख रुपये का नुकसान। राजेश ने सोचा कि अच्छा ही हुआ, कम से कम छह लाख तो बच गए। बाजार तो और गिरेगा।
लेकिन हुआ उल्टा। अप्रैल से दिसंबर तक बाजार न केवल रिकवर हुआ बल्कि नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया। अगर राजेश ने अपनी होल्डिंग्स नहीं बेची होतीं तो दो हजार तेईस तक उनके दस लाख रुपये सोलह लाख हो जाते। लेकिन डर की वजह से लिए गए गलत फैसले ने उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया।
विनीता की कहानी बिल्कुल अलग है। उनके पास भी दस लाख रुपये निफ्टी इंडेक्स फंड में थे। जब कोविड आया और बाजार गिरा, तो विनीता को भी डर लगा। लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया। उनकी एसआईपी चालती रही। हर महीने पांच हजार रुपये जाते रहे। मार्च में, अप्रैल में, मई में – जब बाजार सबसे नीचे था। और धीरे-धीरे बाजार उठा। दो हजार तेईस तक विनीता के दस लाख रुपये सोलह लाख हो गए। छह लाख का मुनाफा।
यह है इंडेक्स फंड का सबसे बड़ा फायदा। यह आपको खुद से बचाता है। जब आप डरते हैं तो यह आपको बेचने नहीं देता क्योंकि आप पहले से जानते हैं कि यह लंबी अवधि का निवेश है। जब आप लालची होते हैं तो यह आपको ज्यादा रिस्क नहीं लेने देता क्योंकि आप जानते हैं कि यह स्थिर निवेश है। भावनाएं निवेश की सबसे बड़ी दुश्मन हैं और इंडेक्स फंड आपको इन भावनाओं से बचाता है।
छिपी हुई फीस का खेल
राकेश ने एक एक्टिव इक्विटी फंड में दस लाख रुपये लगाए थे। उन्हें लगा कि फीस तो डेढ़ प्रतिशत है, ज्यादा तो नहीं है। लेकिन बीस साल बाद जब उन्होंने हिसाब लगाया तो हैरान रह गए। उन्होंने कुल आठ लाख बीस हजार रुपये फीस के रूप में चुकाए थे।
सोचिए, आठ लाख बीस हजार रुपये। यह पैसा अगर निवेश में लगा रहता तो और कितना बढ़ जाता। यह है छिपी हुई लागत का असर। हर साल थोड़ा-थोड़ा कटता है लेकिन बीस साल में यह एक बहुत बड़ी रकम बन जाता है।
अब मीना की कहानी देखिए। उन्होंने भी दस लाख रुपये निवेश किए लेकिन इंडेक्स फंड में जिसका एक्सपेंस रेशियो दशमलव दो प्रतिशत था। बीस साल में उन्होंने कुल बयासी हजार रुपये फीस के रूप में दिए। अंतर साफ है। मीना ने राकेश से सात लाख अड़तीस हजार रुपये कम फीस दी। यह सात लाख अड़तीस हजार रुपये मीना की जेब में रहे और बढ़ते रहे।
यह है पारदर्शिता और कम लागत का फायदा। इंडेक्स फंड में कोई छिपा हुआ चार्ज नहीं है। आपको एक्सपेंस रेशियो साफ-साफ दिखता है और वह बहुत कम होता है।
बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना
सुरेश और प्रीति की तीन साल की बेटी है। वे अपनी बेटी को पंद्रह साल बाद आईआईटी या मेडिकल कॉलेज भेजना चाहते हैं। आज आईआईटी की पूरी फीस लगभग दस लाख रुपये है। लेकिन पंद्रह साल बाद, आठ प्रतिशत महंगाई दर से यह फीस बत्तीस लाख रुपये हो जाएगी।
सुरेश और प्रीति ने फैसला किया कि वे हर महीने आठ हजार रुपये निफ्टी इंडेक्स फंड में निवेश करेंगे। अगर उन्हें औसतन बारह प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता है, तो पंद्रह साल बाद उनके पास पैंतीस लाख रुपये होंगे। यह रकम उनकी बेटी की पढ़ाई के लिए काफी होगी।
क्या खास बात है इसमें? यह कि सुरेश और प्रीति को पंद्रह साल तक कुछ करना नहीं है। बस हर महीने की दस तारीख को आठ हजार रुपये अपने आप कट जाएंगे और निवेश हो जाएंगे। कोई टेंशन नहीं, कोई चिंता नहीं। जब तक बेटी बड़ी होगी, उसकी पढ़ाई का पैसा तैयार हो चुका होगा।
यह है इंडेक्स फंड की ताकत लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए। चाहे बच्चों की पढ़ाई हो, शादी हो, घर खरीदना हो या रिटायरमेंट प्लानिंग – इंडेक्स फंड सबके लिए बेहतरीन विकल्प है।
जब तुलना करते हैं तो सच्चाई सामने आती है
रंजना के पास दस लाख रुपये थे। उन्होंने यह पैसा बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट में रख दिया। ब्याज मिल रहा था साढ़े छह प्रतिशत। उन्हें लगा कि यह सुरक्षित है और हर साल पैसेपांच हजार रुपये का ब्याज आएगा।
लेकिन रंजना भूल गईं महंगाई का हिसाब लगाना। वे तीस प्रतिशत टैक्स ब्रैकेट में थीं। तो साढ़े छह प्रतिशत ब्याज में से लगभग दो प्रतिशत टैक्स के रूप में चला गया। बचा साढ़े चार प्रतिशत। और महंगाई थी छह से सात प्रतिशत। मतलब रंजना के पैसे की असली वैल्यू हर साल कम हो रही थी।
दस साल बाद रंजना के पास सत्रह लाख नब्बे हजार रुपये थे। लेकिन महंगाई एडजस्ट करके देखें तो इस पैसे की असली वैल्यू थी केवल नौ लाख तीस हजार रुपये। मतलब दस साल में रंजना ने असल में कोई पैसा नहीं कमाया बल्कि उनके पैसे की वैल्यू घट गई।
अब रेखा की कहानी देखिए। उन्होंने भी दस लाख रुपये निवेश किए लेकिन इंडेक्स फंड में। दस साल बाद उनके पास इकतीस लाख रुपये थे। महंगाई एडजस्ट करके देखें तो इसकी असली वैल्यू थी सोलह लाख रुपये। रेखा ने न केवल महंगाई को हराया बल्कि उनके पैसे की असली वैल्यू भी बढ़ी।
यह है फिक्स्ड डिपॉजिट और इंडेक्स फंड में फर्क। एफडी में आपका पैसा सुरक्षित तो रहता है लेकिन बढ़ता नहीं। इंडेक्स फंड में थोड़ा रिस्क है लेकिन लंबी अवधि में आपका पैसा वाकई बढ़ता है।
सोना भी उतना चमकदार नहीं
भारतीय परिवारों में सोने का खास महत्व है। शादी-ब्याह में सोना, त्योहारों पर सोना, बचत के लिए भी सोना। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पिछले तीस साल में सोने ने औसतन केवल आठ से नौ प्रतिशत सालाना रिटर्न दिया है?
और यह तो सिर्फ कीमत का हिसाब है। अगर आप फिजिकल गोल्ड यानी ज्वेलरी खरीदते हैं तो मेकिंग चार्ज अलग से लगता है। जब बेचते हैं तो वह मेकिंग चार्ज वापस नहीं मिलता। फिर स्टोरेज की चिंता। बैंक लॉकर का किराया। या घर में रखें तो सुरक्षा की चिंता।
इंडेक्स फंड में ये सारी समस्याएं नहीं हैं। पिछले तीस साल में इंडेक्स फंड्स ने बारह से तेरह प्रतिशत सालाना रिटर्न दिया है। कोई स्टोरेज चार्ज नहीं। कोई मेकिंग चार्ज नहीं। और सबसे बड़ी बात, जो कंपनियां आपके इंडेक्स फंड में हैं वे डिविडेंड भी देती हैं जो अपने आप रेइन्वेस्ट हो जाता है।
हां, पोर्टफोलियो में थोड़ा सोना रखना अच्छी बात है। डाइवर्सिफिकेशन के लिए दस से पंद्रह प्रतिशत सोना रख सकते हैं। लेकिन पूरी बचत सोने में लगाना समझदारी नहीं है। बाकी का ज्यादातर हिस्सा इंडेक्स फंड में होना चाहिए।
जब आप खुद स्टॉक्स चुनने की सोचते हैं
विकास को लगता था कि वे स्मार्ट हैं। उन्होंने बिजनेस न्यूज़ पढ़ी, यूट्यूब पर विडियो देखे, और सोचा कि वे खुद स्टॉक्स चुन सकते हैं। उन्होंने पचास हजार रुपये लेकर पांच कंपनियों के शेयर खरीदे। शुरुआत अच्छी रही। एक स्टॉक बीस प्रतिशत बढ़ गया।
फिर मुसीबत शुरू हुई। दूसरी कंपनी के नतीजे खराब आए और शेयर तीस प्रतिशत गिर गया। तीसरी कंपनी में कोई स्कैम की खबर आई और शेयर पचास प्रतिशत गिर गया। विकास रोज दस बार अपना पोर्टफोलियो चेक करते। कब बेचें, कब खरीदें, यह तय नहीं कर पाते। एक साल में उनके पचास हजार रुपये घटकर पैंतीस हजार रह गए।
विकास को समझ आया कि डायरेक्ट स्टॉक्स में सफल होना बहुत मुश्किल है। आपको हर कंपनी को समझना होगा। बैलेंस शीट पढ़नी होगी। मैनेजमेंट की क्वालिटी जांचनी होगी। इंडस्ट्री के ट्रेंड्स समझने होंगे। और फिर भी कोई गारंटी नहीं कि आप सही चुनाव करेंगे।
इंडेक्स फंड में यह सब नहीं करना पड़ता। निफ्टी पचास में पहले से ही भारत की सबसे बेहतरीन पचास कंपनियां चुनी हुई हैं। जो एक्सपर्ट्स की टीमें हैं वे तय करती हैं कि कौन सी कंपनी इंडेक्स में रहेगी। अगर कोई कंपनी खराब परफॉर्म करती है तो उसे बाहर कर दिया जाता है और बेहतर कंपनी अंदर आ जाती है।
और सबसे बड़ी बात, अगर एक कंपनी पूरी तरह डूब भी जाए तो आपके पोर्टफोलियो पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वह केवल दो प्रतिशत या उससे कम होती है। लेकिन डायरेक्ट स्टॉक्स में अगर आपकी एक कंपनी डूबी तो आपका बीस प्रतिशत पैसा डूब सकता है।
हर उम्र के लिए अलग फॉर्मूला
अभय पच्चीस साल के हैं और अभी-अभी नौकरी शुरू की है। उनके लिए इंडेक्स फंड परफेक्ट है। उनके पास तीस से पैंतीस साल का समय है रिटायरमेंट तक। वे अपनी सैलरी का बीस प्रतिशत निफ्टी इंडेक्स फंड में लगा रहे हैं। हर साल जब सैलरी बढ़ती है तो वे अपनी एसआईपी दस प्रतिशत बढ़ा देते हैं।
अभय के लिए यह बिल्कुल सही है क्योंकि उनके पास लंबा समय है। अगर बाजार गिरता भी है तो वे घबराते नहीं क्योंकि जानते हैं कि अभी तीस साल और हैं। गिरावट में वे और सस्ता खरीद रहे हैं। कंपाउंडिंग का पूरा फायदा उठा रहे हैं।
राजीव अड़तीस साल के हैं। उनका परिवार है, छोटे बच्चे हैं। उनके लिए भी इंडेक्स फंड बहुत अच्छा विकल्प है लेकिन थोड़े अलग तरीके से। वे अपने कुल निवेश का साठ से सत्तर प्रतिशत इंडेक्स फंड में रख रहे हैं। बाकी तीस से चालीस प्रतिशत डेट फंड या फिक्स्ड डिपॉजिट में रख रहे हैं। यह बैलेंस उन्हें ग्रोथ भी देता है और थोड़ी स्टेबिलिटी भी।
राजीव का प्लान है कि बच्चों की पढ़ाई के लिए जो पैसा चाहिए वह इंडेक्स फंड से आएगा। अगले दस-पंद्रह साल में यह पैसा अच्छी तरह बढ़ जाएगा।
संजय पचास साल के हैं। रिटायरमेंट दस साल दूर है। उनके लिए थोड़ी सावधानी जरूरी है। वे अपने पोर्टफोलियो का केवल चालीस से पचास प्रतिशत इंडेक्स फंड में रख रहे हैं। बाकी पचास से साठ प्रतिशत सुरक्षित निवेश में है।
लेकिन संजय जानते हैं कि रिटायरमेंट के बाद भी उन्हें बीस-पच्चीस साल और जीना है। तो उनके लिए भी कुछ ग्रोथ जरूरी है। पूरा पैसा एफडी में रखना सही नहीं होगा। इसलिए वे इंडेक्स फंड में निवेश जारी रख रहे हैं।
कमला साठ साल की हैं और रिटायर हो चुकी हैं। उनके लिए भी इंडेक्स फंड की जगह है लेकिन सीमित मात्रा में। वे अपने पोर्टफोलियो का केवल बीस से तीस प्रतिशत इंडेक्स फंड में रख रही हैं। बाकी सत्तर से अस्सी प्रतिशत एन्युटी और फिक्स्ड डिपॉजिट में है जहां से उन्हें नियमित आय मिल रही है।
लेकिन कमला समझती हैं कि अगर सब कुछ सुरक्षित निवेश में रखा तो महंगाई उनके पैसे को खा जाएगी। इसलिए थोड़ा हिस्सा इंडेक्स फंड में रखना जरूरी है ताकि पैसे की वैल्यू बनी रहे।
जब आप FOMO से मुक्त हो जाते हैं
आप ऑफिस में बैठे हैं और पास की सीट पर राहुल जोर-जोर से बात कर रहा है। “यार, मैंने एक्सवाईजेड कंपनी का शेयर खरीदा था। तीन महीने में पचास प्रतिशत मुनाफा हो गया। काश तुमने भी खरीदा होता।” आपके मन में एक चुभन होती है। आपको लगता है कि आप कुछ मिस कर रहे हैं।
लेकिन अगर आप इंडेक्स फंड निवेशक हैं तो आप शांति से मुस्कुरा सकते हैं। क्योंकि आपको पता है कि अगर एक्सवाईजेड कंपनी सच में इतनी अच्छी है, तो वह जल्द ही निफ्टी पचास में आ जाएगी। और जब आएगी तो आपके इंडेक्स फंड में अपने आप शामिल हो जाएगी। आपको कुछ करना नहीं पड़ेगा।
और यह भी याद रखिए कि राहुल केवल अपनी सफलताओं के बारे में बताता है। जिन शेयर्स में उसे नुकसान हुआ है, वह उसके बारे में नहीं बताता। लेकिन वे नुकसान होते हैं और काफी बड़े होते हैं।
इंडेक्स फंड निवेशक को यह एफओएमओ यानी “फियर ऑफ मिसिंग आउट” नहीं होता। आप जानते हैं कि आप पूरे बाजार में निवेशित हैं। कोई भी शेयर अगर वाकई अच्छा है तो वह आपके पोर्टफोलियो में पहले से है या जल्द ही आ जाएगा।
मार्केट टाइमिंग का झंझट खत्म
सोमवार की सुबह है। शेयर बाजार खुलने वाला है। मोहन सोच रहे हैं कि अभी खरीदें या थोड़ा इंतजार करें। शायद बाजार और गिरे तो सस्ता में खरीद लेंगे। लेकिन क्या पता अभी से ही तेजी शुरू हो जाए? तो फिर महंगा पड़ जाएगा। यह चिंता मोहन के दिमाग को खाए जा रही है।
इंडेक्स फंड निवेशक के लिए यह समस्या ही नहीं है। आपकी एसआईपी हर महीने एक तय तारीख को चलती है। कभी बाजार ऊपर होता है, कभी नीचे। आप कभी ऊंचे दाम पर खरीदते हैं, कभी नीचे दाम पर। लेकिन लंबी अवधि में यह सब एवरेज हो जाता है।
यही है रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा। आपको मार्केट टाइमिंग की चिंता नहीं करनी पड़ती। आपको यह तय नहीं करना पड़ता कि कब खरीदें और कब बेचें। बस हर महीने आपका पैसा निवेश होता जाता है और लंबी अवधि में बढ़ता जाता है।
जब रिश्तेदार और दोस्त सलाह देते हैं
रविवार का खाना है। पूरा परिवार इकट्ठा है। चाचाजी को पता चल गया है कि आपने निवेश शुरू किया है। वे कहते हैं, “बेटा, अभी तो बाजार बहुत ऊंचा चल रहा है। मैंने एक चैनल पर देखा था कि जल्द ही बड़ी गिरावट आने वाली है। पैसा निकाल लो।”
ताऊजी की राय अलग है। “अरे, जो करना है जल्दी करो। मेरे दोस्त ने एक कंपनी के बारे में बताया है। वह स्टॉक आसमान छू लेगा। उसमें पैसा लगाओ।”
मौसी कहती हैं, “निवेश-विनेश में मत पड़ो। फिक्स्ड डिपॉजिट सबसे अच्छा। पक्का पैसा मिलता है।”
अगर आप इंडेक्स फंड निवेशक हैं तो आप सबकी बातें धैर्य से सुन सकते हैं और फिर शांति से कह सकते हैं, “मैं पूरे भारत में निवेश कर रहा हूं। मुझे किसी की टिप नहीं चाहिए। मैं लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहा हूं तो छोटी उतार-चढ़ाव से कोई फर्क नहीं पड़ता।”
यह आत्मविश्वास बहुत जरूरी है। और इंडेक्स फंड आपको यह आत्मविश्वास देता है क्योंकि आप जानते हैं कि आप सही रास्ते पर हैं। आपको बाकियों की राय से अपना फैसला बदलने की जरूरत नहीं।
मनोवैज्ञानिक शांति की कीमत
पैसा कमाना जरूरी है लेकिन मानसिक शांति उससे भी ज्यादा जरूरी है। इंडेक्स फंड निवेश की सबसे बड़ी कीमत नहीं है रुपयों में, बल्कि मानसिक शांति में है।
जब आप सुबह उठते हैं तो आपका पहला काम शेयर बाजार चेक करना नहीं है। आप अपना दिन शांति से शुरू करते हैं। नाश्ते की मेज पर परिवार के साथ बात करते हैं, न कि मोबाइल में शेयर प्राइस देखते हैं।
दफ्तर में आप अपने काम पर ध्यान दे सकते हैं। हर आधे घंटे में पोर्टफोलियो चेक करने की जरूरत नहीं। आपका दिमाग साफ रहता है और आप बेहतर काम कर पाते हैं।
शाम को जब आप घर लौटते हैं तो बच्चों के साथ खेल सकते हैं। उनके होमवर्क में मदद कर सकते हैं। अपनी पत्नी या पति के साथ क्वालिटी टाइम बिता सकते हैं। निवेश की चिंता आपकी जिंदगी को नहीं खा रही है।
रात को जब सोते हैं तो आराम से सो सकते हैं। यह चिंता नहीं कि कल सुबह मार्केट क्या करेगा। आपको पता है कि आपका निवेश सुरक्षित है। धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से बढ़ रहा है।
यह मानसिक शांति अमूल्य है। और इंडेक्स फंड आपको यह शांति देता है।
तो क्या यह सच में इतना आसान है?
जवाब है – हां, लेकिन आसान और सरल में फर्क है। इंडेक्स फंड में निवेश करना सरल है। एक बार एसआईपी शुरू कर दो और चलने दो। लेकिन इसे जारी रखना, खासकर जब बाजार गिरता है, वह आसान नहीं है। उसके लिए धैर्य चाहिए।
खरीदना आसान है। बेचना नहीं। दरअसल, सही इंडेक्स फंड निवेशक को बेचना बहुत कम करना पड़ता है। आप बस होल्ड करते रहते हैं। साल दर साल, दशक दर दशक।
हर महीने एसआईपी करना आसान है। लेकिन जब बाजार बीस प्रतिशत गिर जाए तो एसआईपी जारी रखना, वह मुश्किल है। मन करता है कि रोक दें, बाजार और गिरेगा। लेकिन असली निवेशक वह है जो गिरावट में भी एसआईपी जारी रखता है।
जल्दी अमीर बनने का लालच छोड़ना भी मुश्किल है। जब दोस्त बता रहे हों कि उन्होंने छह महीने में दुगना पैसा बना लिया, तो मन करता है कि हम भी वैसा करें। लेकिन धैर्य रखना और अपने रास्ते पर बने रहना – यही असली चुनौती है।
Kya Index Fund Safe Hai
इंडेक्स फंड निवेश का सबसे सरल तरीका है। आप भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में एक साथ निवेश करते हैं। महज पांच सौ रुपये महीना से शुरू कर सकते हैं। आपको एक्सपर्ट बनने की जरूरत नहीं है। फीस बहुत कम है। और सबसे बड़ी बात, यह आपको मानसिक शांति देता है।
यह हर उम्र के लोगों के लिए उपयुक्त है। चाहे आप पच्चीस साल के हों या पचास साल के। बस निवेश का अनुपात बदलता है। यह बच्चों के भविष्य के लिए भी बेहतरीन है और रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए भी।
इंडेक्स फंड आपको खुद से बचाता है। भावनाओं से बचाता है। गलत फैसलों से बचाता है। यह आपको एफओएमओ से मुक्त करता है। मार्केट टाइमिंग के झंझट से बचाता है। और दूसरों की सलाह से भी मुक्त करता है।
लेकिन याद रखिए, यह कोई जादू की छड़ी नहीं है। यह धीरे-धीरे काम करता है। इसमें धैर्य चाहिए। समय चाहिए। और सबसे बड़ी बात, विश्वास चाहिए – भारत की अर्थव्यवस्था में विश्वास, भारत की कंपनियों में विश्वास, और खुद में विश्वास।
अगला पड़ाव
अगले अध्याय में हम गहराई से समझेंगे भारत के प्रमुख इंडेक्स। निफ्टी पचास क्या है? सेंसेक्स कैसे काम करता है? निफ्टी सौ और निफ्टी पांच सौ में क्या फर्क है? कौन सा इंडेक्स किसके लिए बेहतर है?
इन सवालों के जवाब जानने के लिए आप सीखेंगे कि इंडेक्स कैसे बनते हैं, कैसे उनमें बदलाव होते हैं, और कैसे तय करें कि कौन सा इंडेक्स फंड आपके लिए सही है। यह ज्ञान आपको सही निर्णय लेने में मदद करेगा।
याद रखें:
“सबसे अच्छा निवेश वह है जो आपको रात को चैन की नींद सोने दे। और इंडेक्स फंड ठीक यही करता है।”
अगला अध्याय: “भारत के प्रमुख इंडेक्स: निफ्टी, सेंसेक्स और अन्य“
