अध्याय 7: सबसे अच्छा इंडेक्स फंड कैसे चुनें? | Best Index Fund Kaise Chunein

Best Index Fund Kaise Chune
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संदीप की समस्या – कौन सा इंडेक्स फंड खरीदें?

संदीप ने तय कर लिया था कि वे निफ्टी 50 इंडेक्स फंड में निवेश करेंगे। उन्होंने सारी बातें समझ ली थीं – इंडेक्स फंड क्यों अच्छा है, एक्टिव फंड से कैसे बेहतर है, क्यों एफडी से ज्यादा फायदा होगा। सब कुछ क्लियर था।

फिर उन्होंने म्यूचुअल फंड ऐप खोला और “निफ्टी 50 इंडेक्स फंड” सर्च किया। स्क्रीन पर आ गईं पंद्रह अलग-अलग स्कीम्स। एसबीआई निफ्टी ५० इंडेक्स फंड, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल निफ्टी 5० इंडेक्स फंड, एचडीएफसी इंडेक्स फंड-निफ्टी 5० प्लान, यूटीआई निफ्टी 50 इंडेक्स फंड, एक्सिस निफ्टी 50 इंडेक्स फंड… और भी बहुत सारे।

संदीप फिर से कन्फ्यूज हो गए। “ये सब तो एक ही चीज ट्रैक करते हैं – निफ्टी 50। तो फर्क क्या है? कौन सा खरीदूं? कैसे तय करूं कि कौन सा बेस्ट है?”

उन्होंने गूगल पर सर्च किया – “best nifty 50 index fund”, “nifty 50 index fund comparison”, “which index fund to buy”, “top index funds in India”। हर वेबसाइट अलग-अलग फंड रिकमेंड कर रही थी। कोई कह रहा था एसबीआई बेस्ट है, कोई कह रहा था आईसीआईसीआई।

अगर आप भी संदीप की तरह यह सोच रहे हैं कि कौन सा इंडेक्स फंड चुनें, तो यह अध्याय आपके लिए है। हम स्टेप बाई स्टेप समझेंगे कि सही इंडेक्स फंड कैसे चुना जाता है।

इंडेक्स फंड चुनने के लिए सबसे जरूरी बातें

सबसे पहले यह समझ लीजिए कि सभी निफ्टी 50 इंडेक्स फंड्स लगभग एक जैसे ही होते हैं। क्योंकि सबको एक ही चीज ट्रैक करनी है – निफ्टी 50 इंडेक्स। तो सब एक जैसे ही स्टॉक्स खरीदेंगे, एक जैसे प्रॉपर्शन में। इसलिए परफॉर्मेंस में भी ज्यादा फर्क नहीं होगा।

लेकिन फिर भी कुछ फैक्टर्स हैं जो एक फंड को दूसरे से बेहतर बनाते हैं। आइए इन्हें एक-एक करके समझते हैं।

एक्सपेंस रेशियो – सबसे महत्वपूर्ण चीज

एक्सपेंस रेशियो यानी वह फीस जो फंड हाउस हर साल आपसे लेता है। यह आपके निवेश का एक प्रतिशत होता है। मान लीजिए आपने एक लाख रुपये लगाए हैं और एक्सपेंस रेशियो है 0.2%। तो हर साल दो सौ रुपये फंड हाउस की फीस के रूप में कट जाएंगे।

यह फीस रोज थोड़ा-थोड़ा करके काटी जाती है। आपको अलग से देनी नहीं पड़ती। यह एनएवी में से कट जाती है। लेकिन इसका असर बहुत बड़ा होता है।

आइए दो फंड्स की तुलना करते हैं। फंड ए का एक्सपेंस रेशियो है 0.1% और फंड बी का है 0.5%। दोनों निफ्टी 50 को ट्रैक करते हैं। आपने दोनों में एक-एक लाख रुपये लगाए।

दस साल बाद, अगर निफ्टी ने 12% सालाना रिटर्न दिया, तो फंड ए में आपके पास होगा ३.०५ लाख रुपये। और फंड बी में होगा २.९८ लाख रुपये। सात हजार रुपये का फर्क।

बीस साल बाद यह फर्क और बड़ा हो जाएगा। फंड ए में 9.20 लाख और फंड बी में 8.50 लाख। सत्तर हजार रुपये का फर्क। यह है कंपाउंडिंग का असर।

इसलिए जब भी इंडेक्स फंड चुनें, सबसे पहले एक्सपेंस रेशियो देखें। जो फंड सबसे कम एक्सपेंस रेशियो दे रहा है, वह आमतौर पर बेहतर है।

ट्रैकिंग एरर – फंड इंडेक्स को कितना अच्छे से फॉलो करता है

ट्रैकिंग एरर बताता है कि फंड का रिटर्न इंडेक्स से कितना अलग है। आदर्श स्थिति में, एक इंडेक्स फंड को बिल्कुल इंडेक्स जैसा ही रिटर्न देना चाहिए। अगर निफ्टी 5० ने 12% दिया, तो फंड को भी 12% देना चाहिए (एक्सपेंस रेशियो घटाकर)।

लेकिन व्यावहारिक रूप में हमेशा थोड़ा फर्क आता है। कभी फंड 0.1% ज्यादा देता है, कभी 0.2% कम। यह फर्क ही ट्रैकिंग एरर है।

ट्रैकिंग एरर क्यों आता है? कई कारण हैं। फंड के पास थोड़ा कैश रखना पड़ता है रिडेम्प्शन के लिए। जब इंडेक्स में कोई स्टॉक ऐड होता है या रिमूव होता है, तो फंड को उसे खरीदना या बेचना पड़ता है। उस समय मार्केट प्राइस थोड़ा ऊपर-नीचे हो सकता है। डिविडेंड मिलता है तो उसे रीइन्वेस्ट करने में थोड़ा समय लगता है।

जिस फंड का ट्रैकिंग एरर कम है, वह बेहतर है। इसका मतलब है कि फंड मैनेजर अच्छे से काम कर रहा है और फंड इंडेक्स को अच्छे से फॉलो कर रहा है।

“आप कैसे चेक करें? फंड की वेबसाइट पर जाएं या मॉर्निंगस्टार, वैल्यू रिसर्च जैसी वेबसाइट्स पर देखें। वहां पिछले तीन साल का ट्रैकिंग एरर दिया होगा।” जो फंड 0.1% से 0.3% के बीच ट्रैकिंग एरर दिखा रहा है, वह अच्छा है।

फंड साइज – एयूएम कितना है

एयूएम यानी Assets Under Management। यह बताता है कि फंड में कुल कितना पैसा है। मान लीजिए किसी फंड का एयूएम है एक हजार करोड़ रुपये। इसका मतलब है कि सभी निवेशकों ने मिलकर इस फंड में एक हजार करोड़ रुपये लगाए हैं।

फंड साइज क्यों मायने रखता है? क्योंकि छोटे फंड्स को कुछ दिक्कतें आती हैं। मान लीजिए एक फंड का एयूएम केवल पचास करोड़ रुपये है। निफ्टी ५० में सबसे छोटे स्टॉक का वेटेज मान लीजिए ०.५% है। तो फंड को उस स्टॉक में केवल पच्चीस लाख रुपये निवेश करने हैं। लेकिन एक बार में इतना छोटा ऑर्डर देने पर अच्छा प्राइस नहीं मिलता। ट्रांजेक्शन कॉस्ट ज्यादा आती है।

बड़े फंड्स को यह समस्या नहीं होती। अगर फंड का एयूएम पांच हजार करोड़ है, तो उसी स्टॉक में पच्चीस करोड़ रुपये निवेश होंगे। यह एक अच्छी साइज का ऑर्डर है। बेहतर प्राइस मिलता है, कम ट्रांजेक्शन कॉस्ट आती है।

इसलिए एक नियम है – जो इंडेक्स फंड जितना बड़ा होगा, वह आमतौर पर उतना ही बेहतर चलेगा। कम से कम पांच सौ से एक हजार करोड़ रुपये एयूएम वाला फंड चुनें।

फंड हाउस की साख – कौन सी कंपनी है

फंड हाउस का ट्रैक रिकॉर्ड भी मायने रखता है। कुछ फंड हाउसेस बहुत पुरानी और अनुभवी हैं – जैसे एसबीआई, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, यूटीआई। इनके पास अच्छी टीम है, अच्छी टेक्नोलॉजी है, और लंबा अनुभव है।

कुछ नए फंड हाउसेस भी आए हैं जो अच्छा काम कर रहे हैं। लेकिन अगर आप सेफ खेलना चाहते हैं, तो किसी स्थापित फंड हाउस का ही फंड चुनें।

एक और बात देखें – फंड हाउस की कस्टमर सर्विस कैसी है। अगर कभी कोई समस्या आए, तो आसानी से संपर्क हो सकता है? ऐप और वेबसाइट यूजर फ्रेंडली है? ये छोटी बातें हैं लेकिन लंबी अवधि में महत्वपूर्ण हो जाती हैं।

लॉन्च डेट – फंड कितना पुराना है

एक इंडेक्स फंड जितना पुराना होगा, उतना ही ज्यादा डेटा आपके पास होगा उसका परफॉर्मेंस देखने के लिए। अगर कोई फंड दस साल पुराना है, तो आप देख सकते हैं कि उसने अलग-अलग मार्केट कंडीशन्स में कैसा परफॉर्म किया। बुल मार्केट में, बेयर मार्केट में, साइडवेज मार्केट में।

लेकिन यह कोई बहुत बड़ा फैक्टर नहीं है। अगर कोई नया फंड भी कम एक्सपेंस रेशियो और अच्छा ट्रैकिंग दिखा रहा है, तो उसे चुना जा सकता है।

डायरेक्ट प्लान बनाम रेगुलर प्लान – बहुत जरूरी अंतर

यह बहुत महत्वपूर्ण बात है जो बहुत से लोग नहीं जानते। हर म्यूचुअल फंड के दो प्लान होते हैं – डायरेक्ट और रेगुलर।

रेगुलर प्लान वह है जब आप किसी एजेंट या डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए फंड खरीदते हैं। फंड हाउस उस एजेंट को कमीशन देता है। यह कमीशन कहां से आता है? आपकी जेब से। इसीलिए रेगुलर प्लान का एक्सपेंस रेशियो ज्यादा होता है।

डायरेक्ट प्लान वह है जब आप सीधे फंड हाउस से या किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से खरीदते हैं जो कमीशन नहीं लेता। कोई बिचौलिया नहीं। तो फंड हाउस को किसी को कमीशन नहीं देना। इसलिए डायरेक्ट प्लान का एक्सपेंस रेशियो कम होता है।

कितना फर्क होता है? उदाहरण देखिए। एसबीआई निफ्टी 5० इंडेक्स फंड का डायरेक्ट प्लान एक्सपेंस रेशियो है 0.10%। रेगुलर प्लान का है 0.95%। देखा? लगभग दस गुना फर्क!

एक लाख रुपये का निवेश, बीस साल, 12% रिटर्न मानकर। डायरेक्ट प्लान में मिलेगा 9.40 लाख। रेगुलर प्लान में मिलेगा 7.80 लाख। डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा का फर्क।

इसलिए हमेशा डायरेक्ट प्लान ही चुनें। कभी भी रेगुलर प्लान मत लीजिए। यह सबसे बड़ी गलती है जो नए निवेशक करते हैं।

ग्रोथ ऑप्शन बनाम डिविडेंड ऑप्शन

इंडेक्स फंड्स में दो ऑप्शन होते हैं – ग्रोथ और डिविडेंड (जिसे अब आईडीसीडब्ल्यू यानी Income Distribution cum Capital Withdrawal भी कहा जाता है)।

ग्रोथ ऑप्शन में जो भी रिटर्न होता है, वह फंड में ही रहता है। आपकी यूनिट्स की वैल्यू बढ़ती रहती है। यह कंपाउंडिंग के लिए बेस्ट है क्योंकि सारा पैसा निवेशित रहता है।

डिविडेंड ऑप्शन में जब भी फंड को कंपनियों से डिविडेंड मिलता है, वह आपको दे दिया जाता है। पैसा आपके बैंक अकाउंट में आ जाता है। लेकिन यह कंपाउंडिंग को तोड़ता है।

और एक बड़ी बात – डिविडेंड पर आपको टैक्स देना पड़ता है (अगर आप टैक्सेबल इनकम ब्रैकेट में हैं)। जबकि ग्रोथ ऑप्शन में टैक्स तब लगता है जब आप यूनिट्स बेचते हैं। यानी आपका टैक्स डिफर हो जाता है।

इसलिए लंबी अवधि के निवेश के लिए हमेशा ग्रोथ ऑप्शन ही चुनें। डिविडेंड ऑप्शन केवल तब लें जब आपको नियमित इनकम चाहिए, जैसे रिटायरमेंट के बाद।

रजत की कहानी – गलत चुनाव का नतीजा

रजत ने दो साल पहले निफ्टी 5० इंडेक्स फंड में निवेश करने का फैसला किया था। उन्होंने दो लाख रुपये लगाए। लेकिन उन्होंने कुछ गलतियां कीं।

पहली गलती – उन्होंने रेगुलर प्लान चुना क्योंकि उनके बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर ने कहा था। उन्हें पता नहीं था कि डायरेक्ट और रेगुलर में फर्क होता है।

दूसरी गलती – उन्होंने एक नए, छोटे फंड हाउस का फंड चुना जिसका एयूएम केवल सौ करोड़ था। उस फंड का ट्रैकिंग एरर काफी ज्यादा था – लगभग 0.7%।

तीसरी गलती – उन्होंने डिविडेंड ऑप्शन चुना क्योंकि उन्हें लगा कि डिविडेंड मिलता रहेगा तो अच्छा है।

दो साल बाद , निफ्टी 50, 30% बढ़ गया । रजत का फंड केवल 25% बढ़ा है। छह प्रतिशत पॉइंट का फर्क। यह फर्क आया कहां से?

रेगुलर प्लान की ऊंची फीस ने 2% खा लिया। खराब ट्रैकिंग ने 2% और खा लिया। डिविडेंड ऑप्शन के कारण कंपाउंडिंग नहीं मिला, उससे 1% चला गया। बाकी 1% अन्य छोटी-मोटी लागतों में चला गया।

रजत के दो लाख पर यह मतलब है बारह हजार रुपये का नुकसान। अगर वे सही फंड चुनते – डायरेक्ट प्लान, ग्रोथ ऑप्शन, अच्छा ट्रैकिंग रिकॉर्ड वाला बड़ा फंड – तो आज उनके पास दो लाख साठ हजार के बजाय दो लाख बासठ हजार होते।

प्रिया की स्मार्ट चॉइस

अब प्रिया की कहानी देखिए जिन्होंने सही तरीके से फंड चुना। उन्होंने भी उसी समय दो लाख रुपये निवेश किए थे।

प्रिया ने पहले अच्छी रिसर्च की। उन्होंने पांच-छह बड़े फंड हाउसेस के निफ्टी ५० इंडेक्स फंड्स को शॉर्टलिस्ट किया। फिर एक-एक करके उनका कंपेयर किया।

उन्होंने देखा:

  • फंड हाउस A निफ्टी 50 इंडेक्स फंड – डायरेक्ट ग्रोथ: एक्सपेंस रेशियो 0.10०%, एयूएम 30,000 करोड़, ट्रैकिंग एरर 0.15%
  • फंड हाउस B निफ्टी 50इंडेक्स फंड – डायरेक्ट ग्रोथ: एक्सपेंस रेशियो 0.20%, एयूएम 6,000 करोड़, ट्रैकिंग एरर 0.25%
  • फंड हाउस C निफ़्टी 50 इंडेक्स फंड  – डायरेक्ट ग्रोथ: एक्सपेंस रेशियो 0.20%, एयूएम 5,000 करोड़, ट्रैकिंग एरर 0.20%

प्रिया ने फंड हाउस A का फंड चुना क्योंकि उसका एक्सपेंस रेशियो सबसे कम था, एयूएम सबसे ज्यादा था, और ट्रैकिंग एरर भी सबसे कम था। उन्होंने डायरेक्ट प्लान और ग्रोथ ऑप्शन चुना।

दो साल बाद प्रिया के पास दो लाख साठ हजार रुपये हैं। वे बहुत खुश हैं। उन्हें पता है कि उन्होंने सही फंड चुना और अब वे बिना टेंशन के लंबी अवधि के लिए होल्ड कर सकती हैं।

इंडेक्स फंड चुनने की चेकलिस्ट – स्टेप बाई स्टेप गाइड

अब हम एक प्रैक्टिकल चेकलिस्ट देखते हैं जो आप फॉलो कर सकते हैं:

स्टेप 1: कौन सा इंडेक्स चाहिए – यह तय करें

पहले तय करें कि आपको किस इंडेक्स का फंड चाहिए। अगर आप पहली बार निवेश कर रहे हैं, तो निफ्टी 50 से शुरू करें। बाद में निफ्टी नेक्स्ट 50 या अन्य इंडेक्स भी जोड़ सकते हैं।

स्टेप 2: बड़े फंड हाउसेस की लिस्ट बनाएं

एसबीआई, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, एचडीएफसी, यूटीआई, एक्सिस, निप्पॉन इंडिया – इन फंड हाउसेस के निफ्टी 5० इंडेक्स फंड्स को शॉर्टलिस्ट करें।

स्टेप 3: डायरेक्ट ग्रोथ ऑप्शन चुनें

हमेशा डायरेक्ट प्लान चुनें, रेगुलर नहीं। और ग्रोथ ऑप्शन चुनें, डिविडेंड नहीं। यह बहुत महत्वपूर्ण है।

स्टेप 4: एक्सपेंस रेशियो चेक करें

सभी शॉर्टलिस्टेड फंड्स का एक्सपेंस रेशियो देखें। जो सबसे कम हो, उसे प्राथमिकता दें। आदर्श रूप से 0.1% से 0.25% के बीच होना चाहिए।

स्टेप 5: एयूएम देखें

फंड का एयूएम कम से कम पांच सौ करोड़ होना चाहिए। जितना बड़ा उतना बेहतर। लेकिन यह एकमात्र क्राइटेरिया नहीं होना चाहिए।

स्टेप 6: ट्रैकिंग एरर चेक करें

वैल्यू रिसर्च या मॉर्निंगस्टार पर जाकर पिछले तीन साल का ट्रैकिंग एरर देखें। 0.3% से कम हो तो बेहतर।

स्टेप 7: फाइनल सिलेक्शन करें

अब आपके पास दो-तीन फंड्स बचे होंगे जो लगभग बराबर हैं। इनमें से किसी एक को चुन लें। ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं क्योंकि ये सब लगभग एक जैसे ही परफॉर्म करेंगे।

आम सवालों के जवाब – गूगल पर सर्च किए जाने वाले सवाल

सवाल: क्या एसबीआई का इंडेक्स फंड अच्छा है?

जवाब: हां, एसबीआई म्यूचुअल फंड के इंडेक्स फंड्स भारत में सबसे लोकप्रिय हैं। इनका एक्सपेंस रेशियो बहुत कम है (0.1%) और एयूएम बहुत बड़ा है। ट्रैकिंग एरर भी कम है। यह एक बहुत अच्छा विकल्प है।

सवाल: इंडेक्स फंड में कितना पैसा लगाना चाहिए?

जवाब: यह आपकी उम्र, आय, और लक्ष्यों पर निर्भर करता है। एक सामान्य नियम है – अपनी उम्र को सौ से घटाएं। जो आंकड़ा आए, उतना प्रतिशत इक्विटी में रखें। अगर आप तीस साल के हैं, तो सत्तर प्रतिशत इक्विटी में। उस सत्तर प्रतिशत में से ज्यादातर हिस्सा इंडेक्स फंड्स में रख सकते हैं।

सवाल: निफ्टी 50 बेस्ट है या निफ्टी नेक्स्ट 50?

जवाब: शुरुआत के लिए निफ्टी ५० बेहतर है। यह ज्यादा स्टेबल है। बाद में अगर आप थोड़ा ज्यादा रिस्क ले सकते हैं, तो निफ्टी नेक्स्ट 50 भी जोड़ सकते हैं। आदर्श रूप में 70% निफ्टी 50 और 30% निफ्टी नेक्स्ट 50 का मिक्स अच्छा रहता है।

सवाल: इंडेक्स फंड से पैसा कब निकालना चाहिए?

जवाब: कम से कम पांच साल, आदर्श रूप में दस साल या उससे ज्यादा समय के लिए निवेश करें। बीच में मत निकालिए। केवल तब निकालिए जब आपका वास्तविक लक्ष्य पूरा हो – जैसे बच्चे की पढ़ाई, घर खरीदना, रिटायरमेंट।

सवाल: ETF अच्छा है या इंडेक्स म्यूचुअल फंड?

जवाब: दोनों अच्छे हैं लेकिन नए निवेशकों के लिए इंडेक्स म्यूचुअल फंड ज्यादा सुविधाजनक है। इसमें SIP आसानी से कर सकते हैं। ETF में आपको स्टॉक एक्सचेंज के जरिए खरीदना पड़ता है जो थोड़ा जटिल है। ETF का एक्सपेंस रेशियो थोड़ा कम होता है लेकिन ब्रोकरेज लगती है।

सवाल: एक साथ कितने इंडेक्स फंड लेने चाहिए?

जवाब: ज्यादा से ज्यादा दो-तीन। एक निफ्टी 50, एक निफ्टी नेक्स्ट 50 या निफ्टी मिडकैप, और अगर चाहें तो एक इंटरनेशनल इंडेक्स फंड। इससे ज्यादा लेने की जरूरत नहीं। ज्यादा फंड लेने से कॉम्प्लेक्सिटी बढ़ती है, डाइवर्सिफिकेशन नहीं।

सवाल: क्या हर महीने SIP जरूरी है या एक साथ भी लगा सकते हैं?

जवाब: दोनों तरीके सही हैं। अगर आपके पास एकमुश्त पैसा है, तो एक साथ भी लगा सकते हैं। लेकिन SIP बेहतर है क्योंकि इससे रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा मिलता है। और मनोवैज्ञानिक रूप से भी आसान है – हर महीने थोड़ा-थोड़ा करके निवेश होता रहता है।

सवाल: इंडेक्स फंड में टैक्स कैसे लगता है?

जवाब: जब तक आप यूनिट्स नहीं बेचते, कोई टैक्स नहीं। जब बेचेंगे तब कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। अगर एक साल से ज्यादा होल्ड किया तो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन – 12% टैक्स (एक लाख रुपये तक की कमाई टैक्स फ्री)। एक साल से कम में बेचा तो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन – 20% टैक्स। ( वर्तमान टैक्स दरें जरूर चेक करें। )

ऑनलाइन कहां से खरीदें – बेस्ट प्लेटफॉर्म्स

अब सवाल आता है कि फंड चुनने के बाद खरीदें कहां से। कई विकल्प हैं:

फंड हाउस की वेबसाइट या ऐप से सीधे: यह सबसे डायरेक्ट तरीका है। लेकिन अगर आपको अलग-अलग फंड हाउसेस के फंड चाहिए, तो हर जगह अलग अकाउंट बनाना पड़ेगा। थोड़ा झंझट है।

एमएफ यूटिलिटी (MF Utility): यह एक सेंट्रल प्लेटफॉर्म है जहां से आप किसी भी फंड हाउस का फंड खरीद सकते हैं। बिल्कुल फ्री। कोई कमीशन नहीं। लेकिन इंटरफेस थोड़ा पुराना है।

ग्रो (Groww): बहुत पॉपुलर ऐप है। यूजर फ्रेंडली। सारे फंड्स एक जगह। डायरेक्ट प्लान मिलता है। SIP आसान है। यह एक अच्छा विकल्प है।

कुवेरा (Kuvera): यह भी अच्छा प्लेटफॉर्म है। बिल्कुल फ्री। डायरेक्ट प्लान्स। अच्छा रिपोर्टिंग। थोड़ा ज्यादा डिटेल्ड इंटरफेस।

पेटीएम मनी (Paytm Money): पेटीएम का म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म। आसान है अगर आप पहले से पेटीएम यूज करते हैं। सारी फीचर्स हैं।

कॉइन बाय जीरोधा (Coin by Zerodha): अगर आप पहले से जीरोधा में ट्रेडिंग करते हैं तो यह बढ़िया है। लेकिन अकाउंट ओपनिंग थोड़ी देर लेती है।

 

व्यावहारिक उदाहरण – अजय का फंड सिलेक्शन

आइए एक पूरा उदाहरण देखते हैं। अजय तीस साल के हैं। सॉफ्टवेयर इंजीनियर। महीने की सैलरी 70,000 रुपये। वे हर महीने 10,000 रुपये बचा लेते हैं।

अजय ने तय किया कि वे इंडेक्स फंड में निवेश करेंगे। उन्होंने यह प्रोसेस फॉलो की:

स्टेप 1: उन्होंने तय किया कि मुख्य रूप से निफ्टी 50 में निवेश करेंगे। 7,000 रुपये महीना। बाकी 3,000 रुपये निफ्टी नेक्स्ट 50 में।

स्टेप 2: उन्होंने ग्रो ऐप डाउनलोड किया और अकाउंट बनाया। KYC पूरी की।

स्टेप 3: निफ्टी 50 इंडेक्स फंड सर्च किया। 15 फंड्स आए। उन्होंने फिल्टर लगाया – डायरेक्ट प्लान, ग्रोथ ऑप्शन।

स्टेप 4: बचे हुए फंड्स में से उन्होंने तीन को शॉर्टलिस्ट किया:

  • फंड हाउस A  निफ़्टी 50 इंडेक्स  फंड – डायरेक्ट ग्रोथ (एक्सपेंस रेशियो 0.10%)
  • फंड हाउस B  निफ़्टी 50 इंडेक्स  फंड – डायरेक्ट ग्रोथ (एक्सपेंस रेशियो 0.20%)
  • फंड हाउस C निफ़्टी 50 इंडेक्स  फंड – डायरेक्ट ग्रोथ (एक्सपेंस रेशियो 0.20%)

स्टेप 5: उन्होंने वैल्यू रिसर्च पर जाकर इन तीनों का ट्रैकिंग एरर चेक किया। फंड हाउस B का सबसे कम था। AUM भी सबसे बड़ा था।

स्टेप 6: अजय ने फंड हाउस  B का निफ्टी 50 इंडेक्स फंड – डायरेक्ट ग्रोथ में 7,000 रुपये की मंथली SIP शुरू की।

स्टेप 7: इसी तरह निफ्टी नेक्स्ट 50 के लिए भी उन्होंने फंड हाउस  B का ही फंड चुना। 3,000 रुपये की SIP।

स्टेप 8: दोनों SIP को ऑटो-डेबिट पर सेट किया। हर महीने की 10 तारीख को अपने आप पैसा कट जाएगा।

बस हो गया। अजय का काम खत्म। अब वे अगले पांच साल तक इसे छूएंगे नहीं। बस साल में एक-दो बार देखेंगे कि सब ठीक चल रहा है।

आम गलतियां जो लोग करते हैं

गलती 1: रेगुलर प्लान चुनना यह सबसे बड़ी गलती है। बैंक या एजेंट के कहने पर रेगुलर प्लान ले लेते हैं। लाखों रुपये की जिंदगी भर की कमाई चली जाती है।

गलती 2: परफॉर्मेंस देखकर फंड चुनना लोग देखते हैं कि पिछले एक साल में कौन सा फंड सबसे ज्यादा बढ़ा। लेकिन इंडेक्स फंड्स में यह मायने नहीं रखता। सब लगभग बराबर ही बढ़ेंगे। सिर्फ एक्सपेंस रेशियो और ट्रैकिंग एरर देखिए।

गलती 3: बहुत सारे फंड्स लेना लोग सोचते हैं कि ज्यादा फंड मतलब ज्यादा डाइवर्सिफिकेशन। लेकिन अगर आपने निफ्टी ५०, निफ्टी १००, और निफ्टी ५०० तीनों ले लिए, तो यह मतलब नहीं। तीनों में ज्यादातर कंपनियां कॉमन हैं। बस कॉम्प्लेक्सिटी बढ़ेगी।

गलती 4: मार्केट गिरने पर SIP बंद करना सबसे बड़ी गलती। जब मार्केट गिरता है तो डर लगता है। लोग SIP बंद कर देते हैं। लेकिन असल में गिरावट में ही सस्ता मिलता है। SIP जारी रखनी चाहिए।

गलती 5: छोटे फंड चुनना कभी-कभी लोग किसी नए या छोटे फंड को देखकर सोचते हैं कि इसे ट्राय करते हैं। लेकिन छोटे फंड्स का ट्रैकिंग एरर ज्यादा होता है। हमेशा बड़े, स्थापित फंड्स ही चुनें।

याद रखने योग्य बातें – क्विक रिकैप

इंडेक्स फंड चुनते समय सबसे महत्वपूर्ण है एक्सपेंस रेशियो। जितना कम उतना अच्छा। 0.1% से 0.25% आदर्श है।

हमेशा डायरेक्ट प्लान चुनें, रेगुलर नहीं। यह सबसे बड़ा फर्क डालता है। और हमेशा ग्रोथ ऑप्शन चुनें ताकि कंपाउंडिंग का पूरा फायदा मिले।

बड़े फंड हाउस का फंड चुनें जिसका AUM अच्छा-खासा हो। कम से कम पांच सौ करोड़। और ट्रैकिंग एरर कम हो – 0.3% से कम।

बहुत सारे इंडेक्स फंड्स लेने की जरूरत नहीं। दो-तीन काफी हैं। एक मुख्य लार्ज कैप इंडेक्स (निफ्टी 50), एक मिड कैप अगर चाहें (निफ्टी नेक्स्ट 50 या मिडकैप 150), और एक इंटरनेशनल अगर चाहें।

ग्रो, कुवेरा, या पेटीएम मनी जैसे प्लेटफॉर्म से खरीद सकते हैं । यूजर फ्रेंडली हैं और बिल्कुल फ्री हैं।

एक बार सही फंड चुन लिया तो उसे होल्ड करें। बार-बार बदलने की जरूरत नहीं। कम से कम पांच साल, आदर्श रूप में दस साल या उससे ज्यादा।

अंतिम सलाह

फंड चुनना कोई रॉकेट साइंस नहीं है। सही पैरामीटर्स देखें, थोड़ी रिसर्च करें, और चुन लें। फिर भूल जाएं।

बहुत से लोग महीनों सोचते रहते हैं कि कौन सा फंड सबसे अच्छा है। लेकिन सच तो यह है कि सारे बड़े फंड हाउसेस के निफ्टी ५० इंडेक्स फंड्स लगभग बराबर ही परफॉर्म करते हैं। फर्क बहुत कम होता है।

असली फर्क पड़ता है कब शुरू किया। जितनी जल्दी शुरू करेंगे, उतना ज्यादा समय मिलेगा कंपाउंडिंग के लिए। तो ज्यादा सोचिए मत, आज ही शुरू कीजिए।

याद रखिए – निवेश में परफेक्ट टाइमिंग या परफेक्ट फंड की तलाश मत कीजिए। अच्छा-खासा फंड चुनिए और जल्दी शुरू कीजिए। यही सबसे बड़ा फैसला है।

अगला कदम

अब जब आप जान गए हैं कि सही इंडेक्स फंड कैसे चुनना है, अगला सवाल है – कितना पैसा लगाना चाहिए और कैसे? SIP से या एकमुश्त? कितनी रकम से शुरू करें?

अगले अध्याय में हम इन सवालों के जवाब देंगे। हम समझेंगे कि अलग-अलग उम्र और आय के लोगों को कितना निवेश करना चाहिए। कैसे अपना निवेश प्लान बनाएं। और कैसे अपने लक्ष्यों के हिसाब से रकम तय करें।


याद रखें:

“सबसे अच्छा इंडेक्स फंड वह नहीं है जिसने पिछले साल सबसे ज्यादा रिटर्न दिया, बल्कि वह है जिसका एक्सपेंस रेशियो सबसे कम है और जिसे आप बिना टेंशन के दस साल होल्ड कर सकते हैं।”


अगला अध्याय: “कितना पैसा और कैसे निवेश करें? – निवेश राशि गाइड”

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