अध्याय 10: जानें इंडेक्स फंड में निवेश स्टार्ट करने की पूरी स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस | Index Fund Me Nivesh Karne Ka Step By Step Process

Index Fund Me Nivesh Karne Ka Step By Step Process
Index Fund Me Nivesh Start Karne Ka Step By Step Process

अगर आप निवेश शुरू करना चाहते हैं लेकिन समझ नहीं पा रहे कि इंडेक्स फंड में शुरुआत कैसे करें, तो आप अकेले नहीं हैं। सही फंड चुनने से लेकर अकाउंट खोलने और पहला निवेश करने तक की प्रक्रिया कई लोगों को जटिल लगती है। इस लेख में हम आपको इंडेक्स फंड में निवेश शुरू करने की पूरी स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया आसान भाषा में समझाएंगे, ताकि आप बिना भ्रम के आत्मविश्वास के साथ पहला कदम उठा सकें।

इंडेक्स फंड में निवेश कैसे करें – पूरी जानकारी

अनिता ने इंडेक्स फंड्स के बारे में बहुत कुछ पढ़ लिया था। उन्हें समझ आ गया था कि यह उनके लिए सही है। लेकिन जब असल में निवेश शुरू करने की बारी आई, तो वे घबरा गईं। कहां से शुरू करें? किस प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाएं? कौन सा फंड चुनें? कितना पैसा लगाएं? इतने सवाल थे कि उन्होंने सोचा कि अभी रुक जाती हूं, और पढ़ाई करती हूं।

लेकिन यह गलती बहुत लोग करते हैं। वे इतना सोचते रहते हैं, इतनी रिसर्च करते रहते हैं कि शुरुआत ही नहीं कर पाते। अगर आप भी अनिता की तरह इस दुविधा में हैं, तो यह अध्याय आपके लिए है। हम आपको बिल्कुल आसान भाषा में, कदम दर कदम बताएंगे कि कैसे शुरुआत करें।

पहला कदम – अपना KYC पूरा करें

भारत में किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले आपको केवाईसी यानी “नो योर कस्टमर” प्रक्रिया पूरी करनी होती है। यह एक बार की प्रक्रिया है। एक बार केवाईसी हो गई, तो किसी भी म्यूचुअल फंड कंपनी में निवेश कर सकते हैं।

केवाईसी के लिए आपको चाहिए – आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक अकाउंट की डिटेल्स, और एक फोटो। आजकल यह सब ऑनलाइन हो जाता है। आप किसी भी म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म पर जाइए, वहां केवाईसी का ऑप्शन मिलेगा। वीडियो वेरिफिकेशन होता है जो दस मिनट में हो जाता है।

राजेश ने अपनी केवाईसी रविवार की शाम को की। उन्होंने अपने फोन से ही सब कुछ किया। आधार और पैन की फोटो अपलोड की, एक छोटा सा वीडियो कॉल हुआ, और दो दिन बाद उनकी केवाईसी अप्रूव हो गई। इतना आसान है आजकल।

म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म कैसे चुनें

अब सवाल यह है कि किस प्लेटफॉर्म पर निवेश करें। भारत में कई अच्छे प्लेटफॉर्म हैं – ग्रो, जीरोधा कॉइन, पेटीएम मनी, ईटी मनी, एमएफ यूटिलिटी। सब अच्छे हैं और सब रेगुलेटेड हैं।

आप चाहें तो डायरेक्ट प्लान भी ले सकते हैं जो सबसे सस्ता होता है। या रेगुलर प्लान जिसमें कमीशन एडवाइजर को जाता है। शुरुआती निवेशकों के लिए डायरेक्ट प्लान बेहतर है क्योंकि इसमें एक्सपेंस रेशियो कम होता है।

मीना ने तीन प्लेटफॉर्म्स ट्राई किए। सबमें अकाउंट बनाया और देखा कि कौन सा इस्तेमाल करने में सबसे आसान लगता है। उन्हें ग्रो ऐप पसंद आया क्योंकि इंटरफेस सरल था और सब कुछ हिंदी में भी मिल रहा था। लेकिन यह पर्सनल च्वाइस है। आप अपनी पसंद का कोई भी चुन सकते हैं।

पहली बार निवेश – कितना पैसा लगाएं

बहुत से लोग सोचते हैं कि बड़ी रकम से ही शुरुआत करनी होगी। लेकिन ऐसा नहीं है। आप पांच सौ रुपये महीना से भी शुरू कर सकते हैं। हां, सिर्फ पांच सौ रुपये।

विनय ने अपनी पहली एसआईपी दो हजार रुपये महीना से शुरू की। उन्होंने सोचा कि पहले देखते हैं कैसे चलता है, फिर बढ़ाएंगे। यह सही सोच है। छोटी शुरुआत करिए, समझिए कि सिस्टम कैसे काम करता है, फिर धीरे-धीरे बढ़ाइए।

लेकिन एक गलती मत कीजिएगा – इतना छोटा भी मत करिए कि उसका कोई मतलब न रहे। अगर आपकी महीने की बचत पंद्रह हजार रुपये है, तो पांच सौ रुपये की एसआईपी से काम नहीं चलेगा। कम से कम तीन से पांच हजार तो लगाइए।

कौन सा इंडेक्स फंड चुनें – सबसे जरूरी सवाल

अब आते हैं सबसे महत्वपूर्ण सवाल पर। कौन सा इंडेक्स फंड लें? जब आप किसी भी प्लेटफॉर्म पर देखेंगे, तो दर्जनों इंडेक्स फंड्स दिखेंगे। कन्फ्यूजन होगी। लेकिन घबराइए मत।

शुरुआती लोगों के लिए सबसे अच्छा है – निफ्टी पचास इंडेक्स फंड। यह सबसे लोकप्रिय है, सबसे ज्यादा लिक्विड है, और भारत की पचास सबसे बड़ी कंपनियों को ट्रैक करता है। आपको बस यह देखना है कि किस फंड हाउस का निफ्टी पचास इंडेक्स फंड लेना है।

यहां देखने वाली बात है – एक्सपेंस रेशियो। जिस फंड का एक्सपेंस रेशियो सबसे कम हो, वह लीजिए। आजकल कुछ फंड दशमलव एक प्रतिशत या उससे भी कम एक्सपेंस रेशियो ऑफर करते हैं। यह बेहतरीन है।

प्रतीक ने तीन फंड हाउसेस के निफ्टी पचास इंडेक्स फंड्स की तुलना की। एक का एक्सपेंस रेशियो दशमलव दो प्रतिशत था, दूसरे का दशमलव एक प्रतिशत, और तीसरे का दशमलव शून्य आठ प्रतिशत। उन्होंने तीसरा वाला चुना। सही फैसला।

SIP कैसे शुरू करें – पूरा प्रोसेस

एसआईपी यानी सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान। इसमें हर महीने एक तय तारीख को आपके अकाउंट से पैसा कट जाता है और इंडेक्स फंड में निवेश हो जाता है। यह सबसे आसान तरीका है निवेश करने का।

जब आप किसी फंड को चुनते हैं, तो आपको दो ऑप्शन मिलते हैं – लम्प सम यानी एकमुश्त, या एसआईपी। शुरुआती लोगों के लिए एसआईपी बेहतर है। क्यों? क्योंकि इसमें आपको मार्केट टाइमिंग की चिंता नहीं करनी पड़ती। हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा जाता रहता है।

सोनल ने अपनी पहली एसआईपी ऐसे शुरू की। उन्होंने ऐप में जाकर निफ्टी पचास इंडेक्स फंड चुना। फिर “स्टार्ट एसआईपी” पर क्लिक किया। उन्होंने अमाउंट डाला – पांच हजार रुपये महीना। तारीख चुनी – हर महीने की पांच तारीख। अपना बैंक अकाउंट सेलेक्ट किया। ई-मैंडेट सेटअप किया जो ऑनलाइन ही हो गया। बस, एसआईपी शुरू हो गई।

पहली तारीख को क्या होगा

अब मान लीजिए सोनल ने पंद्रह जनवरी को एसआईपी सेटअप की। उन्होंने पांच तारीख चुनी थी। तो पांच फरवरी को पहली बार उनके अकाउंट से पांच हजार रुपये कटेंगे।

यह पैसा म्यूचुअल फंड कंपनी के पास जाएगा। वे उस दिन के एनएवी यानी नेट एसेट वैल्यू के हिसाब से सोनल को यूनिट्स अलॉट करेंगे। मान लीजिए उस दिन एनएवी दो सौ रुपये है। तो सोनल को मिलेंगी पच्चीस यूनिट्स।

अगले महीने पांच मार्च को फिर पांच हजार रुपये कटेंगे। अब मान लीजिए एनएवी बढ़कर दो सौ बीस हो गया। तो इस बार सोनल को मिलेंगी लगभग बाईस दशमलव सात यूनिट्स। कम यूनिट्स क्योंकि एनएवी बढ़ गया।

यह है एसआईपी का जादू। जब बाजार नीचे होता है तो आपको ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। जब ऊपर होता है तो कम। लेकिन लंबी अवधि में यह एवरेज हो जाता है।

ऑटो डेबिट कैसे काम करता है

बहुत से लोगों को ऑटो डेबिट को लेकर डर लगता है। उन्हें लगता है कि पता नहीं क्या-क्या कट जाएगा। लेकिन यह बिल्कुल सुरक्षित है।

जब आप एसआईपी शुरू करते हैं, तो आप एक लिमिट सेट करते हैं। मान लीजिए सोनल ने सेट किया कि मेरे अकाउंट से महीने में अधिकतम दस हजार रुपये म्यूचुअल फंड के लिए कट सकते हैं। अब अगर उनकी एक एसआईपी पांच हजार की है, तो बस वही कटेगा। इससे ज्यादा नहीं।

और सबसे बड़ी बात – आप कभी भी एसआईपी रोक सकते हैं। किसी भी महीने अगर आपको लगे कि इस महीने पैसे टाइट हैं, तो आप ऐप में जाकर एक क्लिक में उस महीने की एसआईपी को पॉज कर सकते हैं। कोई पेनाल्टी नहीं, कोई चार्ज नहीं।

पहले महीने में क्या उम्मीद करें

बहुत से नए निवेशक पहले ही महीने में अपना फंड बार-बार चेक करते हैं। आज एनएवी कितना है? कल कितना था? मेरा फंड बढ़ा या घटा? यह गलती है।

अमित ने अपनी पहली एसआईपी शुरू की। पहले हफ्ते तो वे रोज तीन-चार बार ऐप खोलकर देखते थे। एनएवी थोड़ा गिरा तो घबरा गए। सोचने लगे कि कहीं गलत फैसला तो नहीं लिया।

लेकिन फिर उनके एक दोस्त ने समझाया। “भाई, तुम यह पांच साल के लिए कर रहे हो ना? तो पहले महीने का उतार-चढ़ाव से क्या फर्क पड़ता है? छह महीने तक तो देखो भी मत। बस एसआईपी चलने दो।”

यह सही सलाह थी। आपको भी यही करना चाहिए। पहले छह महीने बिल्कुल भूल जाइए कि आपने निवेश किया है। बस जांच लीजिए कि हर महीने एसआईपी कट रही है या नहीं। बस।

दूसरा फंड कब जोड़ें

कुछ लोग एक साथ ही तीन-चार फंड में एसआईपी शुरू कर देते हैं। यह गलती है। पहले एक फंड से शुरुआत कीजिए। कम से कम छह महीने तक एक ही फंड में निवेश कीजिए। समझिए कि यह सिस्टम कैसे काम करता है। आप कम्फर्टेबल हो जाइए।

फिर अगर आपको लगे कि थोड़ी और विविधता चाहिए, तो दूसरा फंड जोड़िए। मसलन आप निफ्टी पचास में तो शुरू कर दिए। छह महीने बाद आप निफ्टी नेक्स्ट पचास भी जोड़ सकते हैं। या एक इंटरनेशनल इंडेक्स फंड।

लेकिन याद रखिए, ज्यादा फंड मतलब ज्यादा कॉम्प्लेक्सिटी। दो-तीन फंड से ज्यादा नहीं होने चाहिए। कुछ लोगों के पास दस-बारह फंड होते हैं। फिर वे ट्रैक नहीं कर पाते, कन्फ्यूज हो जाते हैं।

कितनी बार फंड चेक करें

यह एक बहुत अहम सवाल है। बहुत से नए निवेशक रोज अपना पोर्टफोलियो चेक करते हैं। कुछ तो दिन में दो-तीन बार। यह जरूरत से ज्यादा है और नुकसानदेह भी है।

क्यों? क्योंकि जब आप रोज देखेंगे, तो कभी फंड बढ़ा होगा, कभी घटा। यह उतार-चढ़ाव आपको बेचैन करेगा। आप सोचने लगेंगे कि क्या करना चाहिए। और गलत फैसले ले सकते हैं।

बेहतर है कि महीने में एक बार, या तिमाही में एक बार चेक करें। बस इतना देख लें कि एसआईपी ठीक से चल रही है या नहीं। यूनिट्स जमा हो रही हैं या नहीं। बस। ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं।

रितिका ने एक अच्छी आदत बनाई। उन्होंने अपने कैलेंडर में हर तिमाही की आखिरी तारीख को रिमाइंडर लगा दिया – “म्यूचुअल फंड चेक करो”। बस साल में चार बार वे अपना पोर्टफोलियो देखती हैं। यह बिल्कुर सही है।

SIP में बढ़ोतरी कब करें – स्टेप अप का फायदा

जब आप शुरू करते हैं, तो आप एक रकम से शुरू करते हैं। लेकिन हर साल आपकी सैलरी बढ़ती है। तो आपकी एसआईपी भी बढ़नी चाहिए।

एक अच्छी रणनीति है – हर साल अपनी एसआईपी दस प्रतिशत बढ़ा दीजिए। अगर आपने पांच हजार से शुरू किया, तो एक साल बाद साढ़े पांच हजार कर दीजिए। अगले साल छह हजार। इसे स्टेप अप एसआईपी कहते हैं।

कुछ प्लेटफॉर्म्स में यह ऑटोमैटिक हो जाता है। आप सेटिंग में जाकर कह सकते हैं कि हर साल मेरी एसआईपी दस प्रतिशत बढ़ा दो। फिर आपको याद रखने की भी जरूरत नहीं। अपने आप बढ़ती जाएगी।

पहली गलतियों से कैसे बचें

नए निवेशक कुछ आम गलतियां करते हैं। एक – मार्केट गिरने पर घबराकर बेच देना। यह सबसे बड़ी गलती है। अगर आपने पांच साल के लिए निवेश किया है, तो पहले साल का उतार-चढ़ाव से कोई फर्क नहीं पड़ता।

दूसरी गलती – एसआईपी बीच में रोक देना। मान लीजिए छह महीने बाद बाजार गिर गया। आपको लगा कि अब और नहीं। आपने एसआईपी रोक दी। यह गलत है। जब बाजार नीचे होता है, तब तो और ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। तब रोकना नहीं चाहिए।

तीसरी गलती – बहुत ज्यादा रिसर्च में समय गंवाना। कुछ लोग छह महीने रिसर्च करते रहते हैं लेकिन शुरुआत नहीं करते। याद रखिए, पहले शुरू करना जरूरी है। बाद में सीखते जाइएगा।

पहले साल का टारगेट क्या रखें

यह समझना जरूरी है कि पहले साल में आपका फोकस पैसा कमाने पर नहीं होना चाहिए। पहले साल का टारगेट होना चाहिए – नियमितता बनाए रखना।

अगर आपने बारह महीने बिना नागा एसआईपी जारी रखी, तो यह बड़ी सफलता है। भले ही आपका फंड केवल पांच प्रतिशत बढ़ा हो, कोई बात नहीं। आपने एक अच्छी आदत बना ली। आपने अनुशासन सीख लिया।

दूसरे साल से आप थोड़ा एडवांस हो सकते हैं। शायद एक और फंड जोड़ें। एसआईपी की रकम बढ़ाएं। लेकिन पहला साल तो बस आदत बनाने का है।

टैक्स की बात भी समझें

इंडेक्स फंड्स में टैक्स का मामला सरल है। जब तक आप बेचते नहीं, कोई टैक्स नहीं। जब आप यूनिट्स बेचेंगे तब कैपिटल गेन टैक्स लगेगा।

अगर आपने एक साल से कम समय में बेचा, तो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन – पंद्रह प्रतिशत। अगर एक साल से ज्यादा समय बाद बेचा, तो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन – साढ़े बारह प्रतिशत, लेकिन एक साल में एक लाख रुपये तक की कमाई टैक्स फ्री है।

लेकिन यह सब बाद की बात है। शुरुआत में तो आपको बेचना ही नहीं है। तो टैक्स की चिंता फिलहाल मत कीजिए। बस निवेश करते जाइए।

अंतिम सलाह – आज ही शुरू करें

सबसे बड़ी गलती है – टालना। बहुत लोग सोचते हैं कि अगले महीने शुरू करेंगे। फिर अगला महीना आता है, कोई नया बहाना मिल जाता है। और इसी तरह साल निकल जाता है।

अगर आप इस किताब को यहां तक पढ़ चुके हैं, तो आपके पास काफी ज्ञान है। अब सिर्फ एक्शन की जरूरत है। आज ही, इसी हफ्ते, अपना केवाईसी पूरा कीजिए। कोई एक प्लेटफॉर्म चुनिए। निफ्टी पचास इंडेक्स फंड में एसआईपी शुरू कीजिए।

शुरुआत छोटी हो तो कोई बात नहीं। हजार रुपये से भी शुरू कर सकते हैं। लेकिन शुरुआत जरूर कीजिए। याद रखिए, निवेश में सबसे शक्तिशाली चीज समय है। जितनी जल्दी शुरू करेंगे, उतना ज्यादा फायदा होगा।


याद रखें:

“परफेक्ट प्लान की तलाश में वक्त बर्बाद मत करिए। एक अच्छा प्लान आज शुरू करना, परफेक्ट प्लान कल शुरू करने से बेहतर है।”

 

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