अध्याय 8: इंडेक्स फंड में कितना पैसा लगाएं? निवेश शुरू करने से पहले यह जानना ज़रूरी है। | Index Fund Me Kitna Paisa Lagaye

Index Fund Me Kitna Paisa Lagaye
Index Funds Me Kitna Paisa Lagayein

Index Fund में निवेश करने का फैसला तो आसान लगता है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यहीं आकर रुक जाता है— Index Fund me kitna paisa lagaye. और इसी उलझन में ज़्यादातर लोग या तो देर कर देते हैं या गलत शुरुआत कर बैठते हैं। अगर आप भी बिना जोखिम बढ़ाए सही रकम से निवेश शुरू करना चाहते हैं, तो यह लेख आपको व्यावहारिक और आसान तरीके से सही दिशा दिखाएगा।

राहुल की उलझन – हर नए निवेशक की कहानी

राहुल छब्बीस साल के हैं। दो साल पहले उनकी नौकरी लगी थी। अब उनकी सैलरी पचास हजार रुपये महीना है। किराया, खाना, और दूसरे खर्चों के बाद हर महीने पंद्रह हजार रुपये बच जाते हैं।

राहुल ने इंडेक्स फंड के बारे में पढ़ा और उत्साहित हो गए। उन्होंने फैसला कर लिया – मुझे निवेश शुरू करना है। लेकिन फिर सवाल आने लगे। कितना पैसा लगाऊं? पूरे पंद्रह हजार? या थोड़ा कम? एकमुश्त लगाऊं या हर महीने थोड़ा-थोड़ा? अगर अभी बाजार ऊपर है तो थोड़ा इंतजार करूं? पांच सौ रुपये से शुरू करूं या पांच हजार से?

ये सवाल सिर्फ राहुल के नहीं हैं। हर नया निवेशक इन्हीं सवालों से जूझता है। आइए एक-एक करके हर सवाल का जवाब ढूंढते हैं।

इंडेक्स फंड में कितना पैसा लगाना चाहिए?

यह सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। और इसका जवाब हर किसी के लिए अलग है।

पहला नियम – इमरजेंसी फंड पहले बनाएं

राहुल को सबसे पहले समझना होगा कि इंडेक्स फंड में वही पैसा लगाना चाहिए जो उन्हें अगले पांच से दस साल तक नहीं चाहिए। लेकिन इससे पहले उन्हें एक इमरजेंसी फंड बनाना होगा।

इमरजेंसी फंड का मतलब है – ऐसा पैसा जो तुरंत काम आ सके। अगर अचानक नौकरी चली जाए, बीमारी आ जाए, या कोई और आपात स्थिति हो। यह पैसा लिक्विड होना चाहिए यानी तुरंत निकाला जा सके।

इमरजेंसी फंड कितना होना चाहिए? कम से कम छह महीने के खर्च के बराबर। राहुल का महीने का खर्च लगभग पैंतीस हजार रुपये है। तो उन्हें दो लाख दस हजार रुपये का इमरजेंसी फंड चाहिए। यह पैसा सेविंग अकाउंट या लिक्विड फंड में रखना चाहिए। इंडेक्स फंड में नहीं।

हेल्थ इंस्युरेन्स और टर्म इंस्युरेन्स भी जरूर ले लें । 

दूसरा नियम – पचास-तीस-बीस का फॉर्मूला

अब बचे हुए पैसे को कैसे बांटें? एक आसान फॉर्मूला है जिसे बहुत से फाइनेंशियल प्लानर्स फॉलो करते हैं – पचास-तीस-बीस।

आपकी जो भी बचत हो, उसमें से पचास प्रतिशत जरूरतों और छोटे-मोटे खर्चों के लिए। तीस प्रतिशत लंबी अवधि के निवेश के लिए – यहां इंडेक्स फंड आता है। बीस प्रतिशत शॉर्ट टर्म गोल्स के लिए – जैसे अगले साल कार खरीदनी है, या दो साल बाद शादी करनी है।

राहुल के केस में, पंद्रह हजार रुपये में से साढ़े सात हजार तो अभी के खर्चों और छोटी जरूरतों के लिए। साढ़े चार हजार इंडेक्स फंड में। तीन हजार शॉर्ट टर्म सेविंग्स में।

लेकिन यह कोई पत्थर की लकीर नहीं है। आप अपनी जरूरत के हिसाब से बदल सकते हैं।

तीसरा नियम – उम्र के हिसाब से निवेश

एक और फॉर्मूला है जो उम्र पर आधारित है। इक्विटी में निवेश का प्रतिशत = एक सौ माइनस आपकी उम्र।

राहुल की उम्र छब्बीस साल है। तो उनकी कुल बचत का चौहत्तर प्रतिशत इक्विटी यानी इंडेक्स फंड में होना चाहिए। बाकी छब्बीस प्रतिशत डेट यानी एफडी या डेट फंड्स में।

क्यों? क्योंकि राहुल युवा हैं। उनके पास समय बहुत है। अगर बाजार गिरता भी है तो रिकवर होने के लिए तीस-पैंतीस साल हैं। इसलिए वे ज्यादा रिस्क ले सकते हैं।

अगर कोई पचास साल का है, तो उसे केवल पचास प्रतिशत इक्विटी में रखना चाहिए। बाकी पचास प्रतिशत सुरक्षित निवेश में। क्योंकि उसे दस साल बाद रिटायरमेंट के लिए पैसा चाहिए। वह ज्यादा रिस्क नहीं ले सकता।

SIP में कितना पैसा लगाएं – मासिक निवेश की रणनीति

अब राहुल ने तय कर लिया कि वे हर महीने साढ़े चार हजार रुपये इंडेक्स फंड में लगाएंगे। लेकिन अब सवाल है – कैसे लगाएं?

न्यूनतम SIP राशि क्या होनी चाहिए?

बहुत से लोग पूछते हैं – क्या पांच सौ रुपये महीना से शुरू कर सकते हैं? जवाब है – बिल्कुल। ज्यादातर इंडेक्स फंड्स में न्यूनतम एसआईपी पांच सौ या एक हजार रुपये से शुरू हो सकती है।

लेकिन याद रखिए – शुरुआत छोटी से करें, लेकिन हर साल बढ़ाते रहें। पांच सौ रुपये से शुरू किया तो अगले साल छह सौ करें। फिर सात सौ। जैसे-जैसे आपकी सैलरी बढ़े, एसआईपी भी बढ़ाएं।

स्टेप-अप SIP क्या है और क्यों जरूरी है?

स्टेप-अप एसआईपी का मतलब है हर साल अपनी एसआईपी की रकम बढ़ाना। मान लीजिए आपने आज दो हजार रुपये महीना एसआईपी शुरू की। स्टेप-अप एसआईपी में आप तय करते हैं कि हर साल यह दस प्रतिशत बढ़ेगी।

तो अगले साल यह अपने आप बढ़कर दो हजार दो सौ हो जाएगी। उसके अगले साल दो हजार चार सौ बीस। और ऐसे ही बढ़ती रहेगी।

यह क्यों जरूरी है? क्योंकि महंगाई हर साल बढ़ती है। आपकी सैलरी भी हर साल बढ़ती है। अगर आपकी एसआईपी वैसी की वैसी रही, तो आप अपनी बढ़ी हुई कमाई का फायदा नहीं उठा रहे।

पहली बार कितना निवेश करें – शुरुआती गाइड

प्रिया की कहानी देखिए। वे अट्ठाईस साल की हैं। उनके पास पचास हजार रुपये बचत है। वे सोच रही हैं – क्या पूरे पचास हजार एकमुश्त इंडेक्स फंड में लगा दूं? या हर महीने थोड़ा-थोड़ा?

एक अच्छी रणनीति है – अगर आपके पास एकमुश्त पैसा है, तो उसका तीस से चालीस प्रतिशत अभी लगा दें। बाकी को छह से बारह महीने में बांटकर लगाएं।

प्रिया के केस में – पंद्रह हजार अभी निफ्टी पचास इंडेक्स फंड में लगा दें। बाकी पैंतीस हजार को सात महीने में बांटें। यानी हर महीने पांच हजार की एसआईपी।

इससे दो फायदे हैं। एक तो आपका पैसा तुरंत काम पर लग गया। दूसरा, बाकी पैसा धीरे-धीरे लगाकर आप मार्केट टाइमिंग के रिस्क से बच गए।

एकमुश्त या SIP – क्या बेहतर है?

यह बहुत कॉमन सवाल है। लम्प सम अच्छा या एसआईपी? आइए दोनों को समझते हैं।

लम्प सम निवेश के फायदे और नुकसान

लम्प सम यानी एकमुश्त निवेश का सबसे बड़ा फायदा है – अगर आपने सही समय पर निवेश किया तो बहुत अच्छा रिटर्न मिल सकता है। मान लीजिए आपने मार्च दो हजार बीस में जब बाजार क्रैश हुआ था, तब पांच लाख रुपये लगाए। अगले दो साल में बाजार ने शानदार रिकवरी की। आपका पैसा दस लाख हो गया।

लेकिन यहां समस्या है – यह सही समय कैसे पता चलेगा? अगर आपने जनवरी दो हजार बीस में लगाया होता जब बाजार ऊपर था, फिर मार्च में चालीस प्रतिशत क्रैश हो गया। आपके पांच लाख तीन लाख हो गए। यह बहुत डरावना अनुभव है।

तो लम्प सम तभी ठीक है जब आपको पक्का यकीन हो कि यह पैसा आपको दस साल तक नहीं चाहिए। और आप मानसिक रूप से इतने मजबूत हैं कि तीस-चालीस प्रतिशत की गिरावट भी देख सकते हैं बिना घबराए।

SIP निवेश क्यों बेहतर है – रुपी कॉस्ट एवरेजिंग

एसआईपी का सबसे बड़ा फायदा है – आपको मार्केट टाइमिंग की चिंता नहीं करनी पड़ती। आप हर महीने एक तय रकम लगाते रहते हैं। कभी बाजार ऊपर होता है, कभी नीचे। लेकिन लंबी अवधि में यह औसत हो जाता है।

इसे रुपी कॉस्ट एवरेजिंग कहते हैं। मान लीजिए आप हर महीने पांच हजार रुपये की एसआईपी करते हैं। एक महीने में इंडेक्स फंड का एनएवी एक सौ रुपये है। आपको पचास यूनिट्स मिलीं। अगले महीने एनएवी नब्बे रुपये है। आपको पचपन यूनिट्स मिलीं। तीसरे महीने एनएवी एक सौ दस रुपये है। आपको पैंतालीस यूनिट्स मिलीं।

इस तरह आप कभी महंगे में खरीद रहे हैं, कभी सस्ते में। और लंबी अवधि में आपकी औसत कीमत बीच में आ जाती है।

50-50 फॉर्मूला – दोनों का मिश्रण

संजय की कहानी देखिए। उनके पास बोनस के रूप में तीन लाख रुपये मिले। वे सोच रहे थे – पूरे लम्प सम लगा दूं या एसआईपी करूं?

उन्होंने एक बैलेंस्ड अप्रोच अपनाया। डेढ़ लाख रुपये तुरंत निफ्टी पचास इंडेक्स फंड में लगा दिए। बाकी डेढ़ लाख को उन्होंने बारह महीने की एसआईपी में बांट दिया। यानी बारह हजार पांच सौ रुपये हर महीने।

इससे उन्हें दोनों का फायदा मिला। उनका आधा पैसा तो तुरंत काम पर लग गया। और बाकी आधा धीरे-धीरे लग रहा है जिससे मार्केट टाइमिंग का रिस्क कम हो गया।

सैलरी के हिसाब से कितना निवेश करें?

यह बहुत प्रैक्टिकल सवाल है। अलग-अलग सैलरी स्लैब के लोगों को कितना निवेश करना चाहिए?

20-30 हजार सैलरी वालों के लिए

अगर आपकी सैलरी बीस से तीस हजार है, तो आपके पास बचत कम होगी। शायद तीन से पांच हजार रुपये महीना। इसमें से दो हजार रुपये एसआईपी शुरू करें। एक हजार इमरजेंसी फंड बनाने में लगाएं। बाकी दो हजार छोटे-मोटे खर्चों के लिए रखें।

यह कम लग सकता है लेकिन शुरुआत तो करनी ही पड़ेगी। और याद रखें – दो हजार रुपये महीना बीस साल तक, बारह प्रतिशत रिटर्न से, लगभग बीस लाख रुपये बन जाते हैं।

40-60 हजार सैलरी वालों के लिए

इस सैलरी स्लैब में आपके पास थोड़ी ज्यादा बचत होगी। लगभग दस से पंद्रह हजार महीना। इसमें से पांच से सात हजार एसआईपी में लगाएं। तीन हजार इमरजेंसी फंड के लिए। बाकी फ्लेक्सिबल रखें।

पांच हजार रुपये महीना बीस साल तक, बारह प्रतिशत रिटर्न से, पचास लाख रुपये से ज्यादा बन जाते हैं।

80 हजार से 1 लाख सैलरी वालों के लिए

इस स्तर पर आप बीस से पच्चीस हजार बचा सकते हैं। दस से पंद्रह हजार एसआईपी में। पांच हजार शॉर्ट टर्म गोल्स के लिए। बाकी लिक्विडिटी के लिए।

दस हजार रुपये महीना बीस साल तक लगभग एक करोड़ रुपये बन जाते हैं।

1.5 लाख से ज्यादा सैलरी वालों के लिए

अगर आपकी सैलरी डेढ़ लाख या उससे ज्यादा है, तो आप चालीस से पचास हजार बचा सकते हैं। इसमें से बीस से तीस हजार एसआईपी में लगाएं। बाकी को अलग-अलग जगह डाइवर्सिफाई करें।

बीस हजार रुपये महीना बीस साल तक दो करोड़ रुपये बन जाते हैं।

बचत का कितना प्रतिशत निवेश करें?

यह भी एक महत्वपूर्ण सवाल है। कुछ लोग कहते हैं कि आपकी बचत का सौ प्रतिशत निवेश कर देना चाहिए। लेकिन यह सही नहीं है।

30-70 का नियम

एक अच्छा नियम है – अपनी बचत का तीस प्रतिशत लिक्विड रखें। यानी सेविंग अकाउंट या लिक्विड फंड में। यह आपकी इमरजेंसी फंड और छोटे-मोटे खर्चों के लिए।

बाकी सत्तर प्रतिशत निवेश करें। इसमें से ज्यादातर इंडेक्स फंड में। थोड़ा डेट फंड या एफडी में।

मीना की कहानी देखिए। उनकी हर महीने बीस हजार रुपये बचत होती है। वे छह हजार लिक्विड रखती हैं। चौदह हजार निवेश करती हैं – दस हजार इंडेक्स फंड में, चार हजार डेट फंड में।

यह बैलेंस्ड अप्रोच है। आपके पास हमेशा कुछ पैसा तुरंत काम आने के लिए है। और बाकी लंबी अवधि के लिए बढ़ रहा है।

बाजार ऊपर हो तो क्या करें – मार्केट टाइमिंग का सच

यह सबसे कॉमन डर है। “अभी बाजार बहुत ऊपर है। अगर मैं अभी निवेश करूं और बाजार गिर गया तो?”

क्या बाजार गिरने का इंतजार करें?

रवि पिछले दो साल से इंतजार कर रहे हैं। उनके पास पांच लाख रुपये हैं जो एफडी में पड़े हैं। वे सोचते हैं कि जब बाजार गिरेगा तब निवेश करेंगे।

दो साल हो गए। बाजार गिरा नहीं। बल्कि पचास प्रतिशत ऊपर चला गया। अगर रवि ने दो साल पहले निवेश किया होता, तो उनके पांच लाख साढ़े सात लाख हो गए होते। लेकिन वे अभी भी इंतजार कर रहे हैं।

यह है मार्केट टाइमिंग का झंझट। कोई नहीं बता सकता कि बाजार कब गिरेगा। और अगर आप इंतजार करते रहे, तो बाजार आपको छोड़कर आगे निकल जाएगा।

टाइम इन द मार्केट बनाम टाइमिंग द मार्केट

एक पुरानी कहावत है – “Time in the market beats timing the market.” मतलब बाजार में समय बिताना, बाजार का समय पकड़ने से बेहतर है।

अगर आपने आज निवेश किया और कल बाजार दस प्रतिशत गिर गया, तो घबराने की जरूरत नहीं। आप तो लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं। दस साल बाद यह दस प्रतिशत की गिरावट कुछ मायने नहीं रखेगी।

SIP से मार्केट टाइमिंग की चिंता खत्म

और अगर आप एसआईपी कर रहे हैं, तो मार्केट टाइमिंग की चिंता ही नहीं करनी चाहिए। आप हर महीने निवेश करते रहिए। कभी बाजार ऊपर होगा, कभी नीचे। लेकिन आप लगातार निवेश करते रहिए।

जब बाजार गिरता है, तो आपको सस्ते में ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। जब बाजार बढ़ता है, तो आपकी पुरानी यूनिट्स की वैल्यू बढ़ती है। दोनों तरह से आपका फायदा है।

इंडेक्स फंड में कितने साल के लिए निवेश करें?

यह समझना बहुत जरूरी है कि इंडेक्स फंड लंबी अवधि का निवेश है। लेकिन “लंबी अवधि” से मतलब क्या है?

कम से कम 5 साल की अवधि जरूरी

इंडेक्स फंड में कम से कम पांच साल के लिए निवेश करें। इससे कम समय में आप नुकसान में हो सकते हैं। क्योंकि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है।

अगर आपको दो साल बाद पैसा चाहिए – मान लीजिए कार खरीदनी है – तो वह पैसा इंडेक्स फंड में मत लगाइए। उसे डेट फंड या एफडी में रखिए।

###10-15 साल की अवधि सबसे बेहतर

लेकिन सबसे अच्छे नतीजे दस से पंद्रह साल या उससे ज्यादा की अवधि में मिलते हैं। इतने लंबे समय में शेयर बाजार के सारे उतार-चढ़ाव समतल हो जाते हैं। और आपको अच्छा रिटर्न मिलता है।

नीलम की कहानी देखिए। उन्होंने बच्चे की पढ़ाई के लिए निवेश शुरू किया जब बच्चा तीन साल का था। अब बच्चा अठारह साल का है और कॉलेज जा रहा है। पंद्रह साल में नीलम के निवेश ने शानदार रिटर्न दिया। और उन्हें बच्चे की फीस की चिंता नहीं है।

20-25 साल – रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए

अगर आप रिटायरमेंट के लिए निवेश कर रहे हैं और अभी आपकी उम्र तीस-पैंतीस साल है, तो आपके पास बीस-पच्चीस साल या उससे भी ज्यादा समय है। इतनी लंबी अवधि के लिए इंडेक्स फंड सबसे बेहतरीन विकल्प है।

कंपाउंडिंग का असली जादू इतने लंबे समय में दिखता है। पांच हजार रुपये महीना पच्चीस साल तक, बारह प्रतिशत रिटर्न से, लगभग एक करोड़ पचास लाख रुपये बन जाते हैं।

याद रखने योग्य बातें – मुख्य सूत्र

पहली और सबसे महत्वपूर्ण बात – इमरजेंसी फंड पहले बनाएं। छह महीने के खर्च के बराबर। यह पैसा सेविंग अकाउंट या लिक्विड फंड में रखें।

दूसरा – छोटी शुरुआत करें लेकिन जरूर करें। पांच सौ या एक हजार रुपये महीना से शुरुआत ठीक है। लेकिन हर साल इसे बढ़ाते रहें।

तीसरा – एसआईपी लम्प सम से बेहतर है ज्यादातर मामलों में। क्योंकि मार्केट टाइमिंग की चिंता नहीं रहती।

चौथा – मार्केट के ऊपर-नीचे होने की चिंता मत करें। लंबी अवधि के लिए निवेश करें। पांच साल से कम के लिए इंडेक्स फंड में मत लगाएं।

पांचवां – अपनी सैलरी का कम से कम बीस प्रतिशत निवेश जरूर करें। और जैसे-जैसे सैलरी बढ़े, निवेश भी बढ़ाएं।

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