अध्याय 1: इंडेक्स फंड क्या होता है? सबसे सरल भाषा में समझें | Index Fund Kya Hota Hai

Index Funds Kya Hota Hai
Index Funds Kya Hota Hai

यह लेख पढ़कर आप जान लेंगे की इंडेक्स फंड क्या होता है? (Index Fund Kya Hota Hai


📌 डिस्क्लेमर

यह ब्लॉग केवल शैक्षिक और जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। यहाँ साझा की गई जानकारी लेखक की व्यक्तिगत समझ और अनुभव पर आधारित है। यह किसी भी प्रकार की निवेश सलाह, वित्तीय सलाह, कानूनी सलाह या टैक्स सलाह नहीं है।किसी भी निवेश निर्णय को लेने से पहले अपनी स्वयं की रिसर्च (Do Your Own Research – DYOR) करें या किसी SEBI-रजिस्टर्ड वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।शेयर बाजार और अन्य निवेश विकल्प जोखिम के अधीन होते हैं। पिछले रिटर्न भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं देते। इस ब्लॉग में दी गई जानकारी के आधार पर किए गए किसी भी लाभ या हानि के लिए लेखक या ब्लॉग किसी भी प्रकार से जिम्मेदार नहीं होगा।


कहानी से शुरुआत करते हैं

राहुल  एक मध्यमवर्गीय परिवार से हैं। वह  हमेशा से पैसा बचाना चाहता था | लेकिन शेयर मार्केट उसे जुआ लगता था। फिक्स्ड डिपॉजिट में ब्याज कम था। म्यूचुअल फंड्स में इतने विकल्प थे कि समझ नहीं आता था कि कौन सा चुनें।

फिर राहुल के दोस्त ने उसे  इंडेक्स फंड के बारे में बताया। “यह बिल्कुल भारतीय शेयर मार्केट जैसा रिटर्न देता है – न ज्यादा, न कम।”

सुनने में सरल लगा, लेकिन राम के मन में सवाल थे। यह काम कैसे करता है? क्या सच में यह इतना आसान है? इसके नुकसान क्या हैं? आइए राहुल के साथ-साथ हम भी इंडेक्स फंड्स की दुनिया को समझते हैं।



इंडेक्स फंड को समझने का सबसे आसान तरीका

इंडेक्स फंड एक ऐसा म्यूचुअल फंड है जो किसी इंडेक्स की हूबहू नकल करता है। जैसे निफ्टी 50 या सेंसेक्स। लेकिन यह समझने के लिए, पहले हमें इंडेक्स को समझना होगा।

कल्पना करें कि आप दिल्ली के सबसे महंगे दस मकानों की औसत कीमत जानना चाहते हैं। हर महीने आप इन दस मकानों की कीमत चेक करते हैं और औसत निकालते हैं। जनवरी में औसत कीमत पांच करोड़ रुपये है। फरवरी में यह बढ़कर साढ़े पांच करोड़ हो जाती है। मार्च में थोड़ी गिरकर साढ़े चार करोड़ रह जाती है। यह आपका “दिल्ली टॉप टेन प्रॉपर्टी इंडेक्स” हुआ।

बिल्कुल इसी तरह शेयर मार्केट में भी इंडेक्स बनते हैं। निफ्टी पचास भारत की सबसे बड़ी पचास कंपनियों का इंडेक्स है, जबकि सेंसेक्स सबसे बड़ी तीस कंपनियों को ट्रैक करता है।


इंडेक्स फंड का जादू कैसे काम करता है?

आइए एक छोटे से उदाहरण से समझते हैं। मान लेते हैं कि हमारे पास सिर्फ पांच कंपनियों का एक छोटा इंडेक्स है जिसे हम “मिनी निफ्टी फाइव” कहते हैं। इसमें रिलायंस का हिस्सा तीस प्रतिशत है, एचडीएफसी बैंक का पच्चीस प्रतिशत, टीसीएस का बीस प्रतिशत, इन्फोसिस का पंद्रह प्रतिशत और आईसीआईसीआई बैंक का दस प्रतिशत।

अब जब आप इंडेक्स फंड में दस हजार रुपये निवेश करते हैं, तो फंड मैनेजर इसी अनुपात में आपका पैसा लगा देता है। रिलायंस में तीन हजार रुपये जाएंगे, एचडीएफसी बैंक में ढाई हजार, टीसीएस में दो हजार, इन्फोसिस में पंद्रह सौ और आईसीआईसीआई बैंक में एक हजार रुपये। परिणाम यह होता है कि आपका रिटर्न बिल्कुल इन पांच कंपनियों के औसत रिटर्न जैसा होगा।


क्यों इंडेक्स फंड आम आदमी का सबसे अच्छा दोस्त है

जब आप किसी एक्टिव म्यूचुअल फंड के बारे में पढ़ते हैं, तो आपको लंबे-चौड़े विवरण मिलते हैं। “हमारा फंड मैनेजर बाजार में उतार-चढ़ाव देखकर अलग-अलग सेक्टर में निवेश करता है। उसका पंद्रह साल का अनुभव है और उसने पिछले तीन साल में शानदार परफॉर्मेंस दिया है।” यह सब सुनने में तो अच्छा लगता है, लेकिन समझना और ट्रैक करना बहुत जटिल हो जाता है।

इसके विपरीत, इंडेक्स फंड की सरलता देखिए। “यह निफ्टी पचास को फॉलो करता है।” बस, इतना ही। कोई जटिल रणनीति नहीं, कोई फंड मैनेजर का जादू नहीं। जो बाजार करेगा, वही आपका फंड करेगा।

यह सरलता सिर्फ समझने में ही नहीं है, बल्कि आपकी जेब पर भी असर डालती है। एक्टिव इक्विटी फंड आपसे हर साल डेढ़ से ढाई प्रतिशत फीस लेते हैं। मतलब अगर आपने दस लाख रुपये निवेश किए हैं, तो हर साल पंद्रह हजार से पच्चीस हजार रुपये फंड हाउस की जेब में चले जाएंगे। लेकिन इंडेक्स फंड में यह फीस केवल दशमलव एक से दशमलव पांच प्रतिशत होती है। यानी आपके दस लाख रुपये पर केवल एक हजार से पांच हजार रुपये सालाना। बचत साफ दिख रही है ना?


फंड मैनेजर का झंझट खत्म

राजू ने एक बार एक बेहतरीन एक्टिव फंड में निवेश किया था जो तीन साल तक शानदार चला। लेकिन फिर फंड मैनेजर बदल गया और नए मैनेजर की रणनीति बिल्कुल अलग थी। फंड का परफॉर्मेंस गिरने लगा और राजू परेशान हो गए। उन्हें समझ नहीं आया कि क्या करें – फंड में बने रहें या बदल लें?

इंडेक्स फंड में यह समस्या ही नहीं आती। फंड मैनेजर कौन है, यह मायने नहीं रखता क्योंकि उसका काम बहुत सीधा है – इंडेक्स को कॉपी करना। चाहे कोई भी मैनेजर हो, आपका फंड वैसा ही चलेगा।

और जब आप इंडेक्स फंड में निवेश करते हैं, तो आपको हमेशा पता रहता है कि आपका पैसा कहां लगा है। कौन सी कंपनी में कितना प्रतिशत है, यह जानकारी बिल्कुल साफ होती है। कल आपका फंड कैसा परफॉर्म करेगा, यह भी आप जानते हैं – बिल्कुल बाजार जैसा।


हर सिक्के के दो पहलू होते हैं

लेकिन ईमानदारी से बात करें तो इंडेक्स फंड के कुछ नुकसान भी हैं। सबसे पहली बात तो यह है कि आपको एवरेज रिटर्न मिलेगा। अगर बाजार बारह प्रतिशत रिटर्न देता है, तो आपको भी लगभग बारह प्रतिशत मिलेगा, फीस घटाने के बाद। किसी शानदार एक्टिव फंड की तरह पंद्रह या सोलह प्रतिशत रिटर्न की उम्मीद मत रखिए।

दूसरी बात, जब बाजार गिरता है तो आपका इंडेक्स फंड भी पूरा गिरेगा। कोई फंड मैनेजर नहीं है जो चालाकी से नुकसान कम करने की कोशिश करे। अगर निफ्टी बीस प्रतिशत गिरा, तो आपका फंड भी बीस प्रतिशत गिरेगा। यह कड़वी सच्चाई है।

तीसरी बात, निफ्टी पचास में बैंकिंग और आईटी सेक्टर का हिस्सा काफी ज्यादा है। अगर ये दो सेक्टर खराब समय से गुजर रहे हैं, तो आपका पूरा रिटर्न प्रभावित होगा। यह कंसंट्रेशन रिस्क कहलाता है।


क्या वाकई में यह काम करता है?

आइए असली डेटा देखते हैं। पिछले दस साल यानी दो हजार चौदह से दो हजार चौबीस के बीच निफ्टी पचास इंडेक्स का प्रदर्शन काफी दिलचस्प रहा है। सबसे बेहतरीन साल रहा दो हजार सत्रह जब अट्ठाईस प्रतिशत रिटर्न मिला। सबसे खराब साल रहा दो हजार अठारह जब छह प्रतिशत का नुकसान हुआ। औसत सालाना रिटर्न रहा लगभग बारह से तेरह प्रतिशत।

अब अगर आपने दो हजार चौदह में एक लाख रुपये निवेश किए होते, तो दो हजार चौबीस तक यह राशि बढ़कर तीन लाख बीस हजार से तीन लाख पचास हजार रुपये के बीच हो गई होती। कुल मिलाकर दो सौ बीस से दो सौ पचास प्रतिशत का रिटर्न। और सबसे खास बात यह कि यह रिटर्न बिना किसी रिसर्च, बिना किसी टेंशन, बिना किसी विश्लेषण के मिला है।


यह जादू नहीं, गणित है

जब आप इंडेक्स फंड में निवेश करते हैं, तो दरअसल आप भारत की सबसे बेहतरीन कंपनियों की वृद्धि में हिस्सेदार बन रहे हैं। रिलायंस जब बड़ी होती है, तो आपका पैसा बढ़ता है। टीसीएस जब नए कॉन्ट्रैक्ट पाती है, तो आपका पैसा बढ़ता है। एचडीएफसी बैंक जब ज्यादा लोन देती है और मुनाफा कमाती है, तो आपका पैसा बढ़ता है। यह सब अपने आप होता है। आपको कुछ करना नहीं पड़ता।

कंपाउंडिंग का असली जादू यहीं काम करता है। हर साल का रिटर्न अगले साल के निवेश की बुनियाद बन जाता है। और यह प्रक्रिया जितनी लंबी चलती है, उतना ही शक्तिशाली होती जाती है।


कौन सा इंडेक्स चुनें? व्यावहारिक सलाह

अगर आप पहली बार निवेश कर रहे हैं, तो निफ्टी पचास इंडेक्स फंड सबसे बेहतरीन विकल्प है। इसमें भारत की सबसे बड़ी पचास कंपनियां हैं और आप महज पांच सौ रुपये महीना से एसआईपी शुरू कर सकते हैं। यह इतना सरल है कि किसी भी नौकरीपेशा व्यक्ति या गृहिणी के लिए परफेक्ट है।

अगर आप थोड़ा ज्यादा डाइवर्सिफिकेशन चाहते हैं, तो निफ्टी सौ इंडेक्स फंड देख सकते हैं। इसमें सौ कंपनियां हैं, जो निफ्टी पचास से थोड़ा ज्यादा फैलाव देता है। शुरुआती निवेश वही है – पांच सौ रुपये महीना।

और अगर आप लगभग पूरे भारतीय बाजार का फायदा उठाना चाहते हैं, तो निफ्टी पांच सौ इंडेक्स फंड भी विकल्प है। इसमें लगभग हर बड़ी और मझोली कंपनी शामिल है। लेकिन शुरुआत करने वालों के लिए निफ्टी पचास ही सबसे अच्छा रहता है।


आम सवाल जो हर किसी के मन में आते हैं

बहुत से लोग पूछते हैं कि क्या वे सिर्फ इंडेक्स फंड में ही निवेश कर सकते हैं। जवाब है – बिल्कुल हां। कई सफल निवेशक ऐसा ही करते हैं। उन्हें कोई जटिल पोर्टफोलियो नहीं चाहिए, कोई मल्टीपल फंड्स नहीं चाहिए। बस एक या दो अच्छे इंडेक्स फंड्स में नियमित निवेश और धैर्य।

दूसरा सवाल होता है कि कितनी उम्र में शुरू करना चाहिए। जवाब सीधा है – जितनी जल्दी हो सके। पच्चीस साल की उम्र में दो हजार रुपये महीना शुरू करना, पैंतीस साल की उम्र में पांच हजार रुपये महीना शुरू करने से बेहतर है। क्योंकि निवेश में समय ही सबसे बड़ा हथियार है।

तीसरा सवाल होता है कि क्या यह बिल्कुल सुरक्षित है। तो सच्चाई यह है कि कोई भी निवेश सौ प्रतिशत सुरक्षित नहीं है। लेकिन इंडेक्स फंड में जोखिम किसी एक कंपनी में निवेश करने से बहुत कम है, क्योंकि आपका पैसा पचास से पांच सौ कंपनियों में फैला हुआ है। अगर एक कंपनी डूबती भी है, तो बाकी उन्चालीस या चार सौ निन्यानबे हैं संभालने के लिए।


मीरा की सच्ची कहानी

मीरा अट्ठाईस साल की हैं और एक कंपनी में काम करती हैं। उनकी तनख्वाह पचास हजार रुपये महीना है और वे पंद्रह हजार रुपये बचा लेती हैं। दो हजार उन्नीस में उन्होंने निवेश शुरू करने का फैसला किया, लेकिन उनका निवेश का कोई अनुभव नहीं था।

उन्होंने बहुत सरल रणनीति अपनाई। पांच हजार रुपये महीना निफ्टी पचास इंडेक्स फंड में एसआईपी शुरू की और बाकी दस हजार रुपये इमरजेंसी फंड और दूसरी जरूरतों के लिए अलग रखे। कोई जटिल प्लानिंग नहीं, कोई मल्टीपल फंड्स नहीं।

पांच साल बाद यानी दो हजार चौबीस में, उन्होंने कुल तीन लाख रुपये निवेश किए थे। उनके फंड की वैल्यू बढ़कर लगभग साढ़े चार लाख रुपये हो गई थी। सवा लाख रुपये का फायदा। सालाना लगभग बारह प्रतिशत रिटर्न।

जब मीरा से पूछा गया कि उनका अनुभव कैसा रहा, तो उन्होंने कहा, “मैंने पांच साल में केवल दस बार अपना फंड चेक किया। कोई टेंशन नहीं, कोई रिसर्च नहीं। हर महीने बस पांच हजार रुपये का ऑटो-डेबिट। और बाकी समय मैंने अपनी जिंदगी जी।”


थोड़ी तकनीकी बात, लेकिन बहुत सरल भाषा में

एनएवी यानी नेट एसेट वैल्यू का मतलब है कि आज आपके फंड की एक यूनिट की कीमत क्या है। मान लीजिए कल एनएवी सौ रुपये थी। निफ्टी आज दो प्रतिशत बढ़ गया। तो आज का एनएवी एक सौ दो रुपये होगा। यह बिल्कुल शेयर की कीमत की तरह काम करता है, बस इसमें पचास शेयर्स का औसत होता है।

एक्सपेंस रेशियो को भी समझना जरूरी है क्योंकि यह आपके रिटर्न पर सीधा असर डालता है। मान लीजिए आपने एक लाख रुपये निवेश किए हैं और एक्सपेंस रेशियो दशमलव दो प्रतिशत है। तो हर साल दो सौ रुपये फंड हाउस की फीस के रूप में कट जाएंगे। यह फीस रोज छोटे-छोटे हिस्से में एनएवी से काट ली जाती है, इसलिए आपको अलग से देना नहीं पड़ता।


पहले महीने में क्या करें?

पहले एक-दो दिन तीन-चार अलग-अलग फंड हाउसेस के निफ्टी पचास इंडेक्स फंड्स देखिए। उनका एक्सपेंस रेशियो चेक कीजिए। पिछले तीन साल का रिटर्न देखिए कि क्या वे इंडेक्स को अच्छे से ट्रैक कर रहे हैं।

फिर अगले दो-तीन दिन में किसी भी अच्छे प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाइए। केवाईसी कंप्लीट कीजिए और बैंक अकाउंट लिंक कीजिए। यह प्रक्रिया आजकल बहुत सरल हो गई है और आधार कार्ड से ऑनलाइन हो जाती है।

अब असली काम शुरू होता है। छोटी एसआईपी से शुरुआत कीजिए। एक हजार या दो हजार रुपये से। ऑटो-डेबिट सेट कर दीजिए ताकि हर महीने अपने आप पैसा कट जाए। और अपने कैलेंडर में छह महीने बाद की तारीख मार्क कीजिए कि तब आप एक बार रिव्यू करेंगे।

और सबसे महत्वपूर्ण – अब छह महीने तक भूल जाइए। रोज एनएवी मत चेक कीजिए। मार्केट की खबरों से परेशान मत होइए। अपनी जिंदगी जीइए। यही इंडेक्स फंड निवेश की सबसे बड़ी खूबसूरती है।


डर और उनके जवाब

बहुत से लोगों को डर लगता है कि अगर सेंसेक्स गिर गया तो क्या होगा। तो सच्चाई यह है कि सेंसेक्स निश्चित रूप से गिरेगा। कई बार। यह तो होना ही है। लेकिन भारत का तीस साल का इतिहास बताता है कि सेंसेक्स कई बार बीस से पचास प्रतिशत तक गिरा है, लेकिन हर बार वापस उठा है और नई ऊंचाइयों पर पहुंचा है। गिरना और उठना बाजार का स्वभाव है।

कुछ लोग कहते हैं कि वे निवेश के बारे में कुछ नहीं जानते। तो यही तो इंडेक्स फंड की सबसे बड़ी खूबी है। आपको एक्सपर्ट बनने की जरूरत नहीं है। आपको बैलेंस शीट पढ़नी नहीं आनी चाहिए। आपको पी/ई रेशियो समझना नहीं आना चाहिए। बस इतना समझिए कि भारत की अर्थव्यवस्था लंबी अवधि में बढ़ती रहेगी। और जब देश बढ़ता है, तो सबसे बड़ी कंपनियां बढ़ती हैं।

तीसरा डर होता है कि कहीं गलत समय में तो निवेश नहीं कर रहा हूं। तो याद रखिए, कोई भी समय गलत नहीं है अगर आप पांच साल या उससे ज्यादा के लिए निवेश कर रहे हैं। और एसआईपी की वजह से तो यह समस्या और भी कम हो जाती है क्योंकि आपका पैसा हर महीने अलग-अलग एनएवी पर निवेश होता रहता है। कभी ऊंचे पर, कभी नीचे पर। यह एवरेजिंग अपने आप हो जाती है।


अगले अध्याय का झलक

अगले अध्याय में हम गहराई से समझेंगे कि इंडेक्स फंड आपके लिए वाकई सही विकल्प क्यों है। हम भारतीय परिवारों की असली वित्तीय जरूरतों को समझते हुए इंडेक्स फंड्स के फायदे और नुकसान की विस्तृत चर्चा करेंगे। क्या यह मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बेहतर है? कितना रिस्क लेना सही है? फिक्स्ड डिपॉजिट से कैसे बेहतर है? ये सभी सवालों के जवाब मिलेंगे।


याद रखें: निवेश में धैर्य सबसे बड़ा हथियार है। धीरे-धीरे, लेकिन लगातार।


 

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